Nikhil KamathPeople with The Prime Minister Shri Narendra Modi x Nikhil Kamath | Episode 6 | By WTF
EVERY SPOKEN WORD
80 min read · 16,167 words- 0:00 – 4:10
Introduction
- NMNarendra Modi
[music] Are the cameras set?
- SPSpeaker
Okay, everyone, we're running out of time. Ayu, he wore his slippers again. Can we please find his shoes? Are we set? Cams rolling, audio rolling.
- NKNikhil Kamath
[music] We will try to draw parallels between politics and entrepreneurship. Zero fear, not afraid of anything. Aur ek aisa decision lein jo aap otherwise nahi le rahe hain because of structure, construct, government, all of that. Woh ek cheez kya hoti hai?
- NMNarendra Modi
Main, main batata hu. [laughing]
- NKNikhil Kamath
Start?
- NMNarendra Modi
Ab tak kitne podcast kiye hai aapne?
- NKNikhil Kamath
पच्चीस, sir.
- NMNarendra Modi
पच्चीस।
- NKNikhil Kamath
हाँ, but हम महीने में एक रात करते हैं बस।
- NMNarendra Modi
अच्छा!
- NKNikhil Kamath
हर महीने में एक दिन, एक podcast और बाकी महीना कुछ नहीं करते।
- NMNarendra Modi
लेकिन जिसको-- जिससे करना है, उसको एक महीने तक समय देकर के उसको-
- NKNikhil Kamath
हाँ।
- NMNarendra Modi
काफी comfort करते हैं।
- NKNikhil Kamath
Correct, correct। In depth में करते हैं। ज्यादातर podcast जो हमने किया है, is about entrepreneurship. हमारी audience पूरी वो category है fifteen to forty, जिनको पहली बार entrepreneurship start करना है। तो हम करते हैं artificial intelligence के बारे में एक episode, metaverse के बारे में एक episode, pharmaceutical चीजों के बारे में, ऐसे very specific subject करते हैं।
- NMNarendra Modi
हमम।
- NKNikhil Kamath
और, और एक चीज हमने अभी शुरू की है people, जिसमें हमने Bill Gates ऐसे कुछ लोगों के साथ बातें की हैं। But again, very specific to the industry they belong to。
- NMNarendra Modi
एक तो मेरे लिए podcast पहली बार हो रहा है।
- NKNikhil Kamath
हमम।
- NMNarendra Modi
और इसलिए मेरे लिए भी ये दुनिया बिल्कुल नई है। [laughing]
- NKNikhil Kamath
तो sir, मुझे माफ कीजिए, अगर मेरी हिंदी ज्यादा अच्छी नहीं हो। मैं South Indian हूं। मैं ज्यादातर Bangalore में पला-बढ़ा हूं और अ... वहां पे लोग, मेरी मम्मी का city Mysore है, तो वहां पे ज्यादा लोग कन्नड़ बोलते हैं और मेरे पापा मंगलुरु के पास से थे। अ... हिंदी मैंने school में सीखी है, but fluency के हिसाब से अ... बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। और लोग कहते हैं कि ज्यादातर communication non-verbal होती है। जो लोग एक दूसरे को देख के समझ जाते हैं, तो I think we should be fine.
- NMNarendra Modi
देखिए, मैं भी हिंदी भाषी नहीं हूं, तो हम दोनों की ऐसे ही चलेगी। [laughing]
- NKNikhil Kamath
और ये एक-- हमारा podcast एक traditional interview नहीं है। मैं journalist नहीं हूं। अ... हम ज्यादातर उन लोगों से बातें करते हैं, जिन्हें पहली बार entrepreneurship करनी हो तो। हम उन्हें यह बताते हैं कि एक industry में entrepreneur बनने के लिए क्या चाहिए? Funding पहली बार कहां से मिले? उन्हें कहां से सीखने के लिए material मिलेंगे online. तो हम उस zone से आ रहे हैं। And along the way, today हम we will try to draw parallels between politics and entrepreneurship, क्योंकि मुझे ऐसा लगा है कि इन दोनों में से बहुत सारी ऐसी similarities हैं, जिसके बारे में किसी ने अब आज तक बातें नहीं की है। तो we will take that direction और आगे चलते हैं। तो अगर आप चाहे इस podcast में कुछ सवाल खुद पूछने के लिए, मेरे पास कोई अच्छे answers नहीं हैं, but आप बेहद पूछ सकते हैं।
- NMNarendra Modi
हमम।
- NKNikhil Kamath
पहली चीज मैं बात करना चाहूंगा, इस podcast में is आपके
- 4:10 – 9:00
Chapter 1 - Childhood
- NKNikhil Kamath
life के पहला, का पहला भाग। Pre PM, pre CM, आप कहां पैदा हुए थे? पहले 10 सालों में आपने क्या किया था? अ... If you can throw some light on the first era of your life.
- NMNarendra Modi
देखिए, वैसे तो सबको पता है, मेरा जन्म गुजरात में, North गुजरात में, मेहसाणा district है। वहां वड़नगर एक छोटा सा town है। जब हम छोटे थे, तब तो शायद पंद्रह हज़ार की आबादी थी। मोटा-मोटा मुझे याद है। मैं उस स्थान से हूं। लेकिन तब तो जैसे हर एक का अपना एक गांव होता है, वैसा एक मेरा गांव था। मेरे गांव एक प्रकार से गायकवाड स्टेट था। तो गायकवाड स्टेट की एक विशेषता थी। हर गांव में education के प्रति बड़े आग्रही थे। एक तालाब होता था, post office होती थी, library होती थी। ऐसे एक चार-पांच चीजें यानी गायकवाड स्टेट का गांव है, तो ये होगा ही होगा। ये उनकी व्यवस्था थी। तो मैं उस गायकवाड स्टेट की जो primary school बनी हुई थी, उसमें ही पढ़ा था। तो मेरी खैर, बचपन में वहीं रहा। तालाब था, तो swimming करना सीख गए वहां। मैं मेरे परिवार के सबके कपड़े मैं धोता था। तो उसके कारण मुझे तालाब जाने की इजाजत मिल जाती थी। बाद में वहां एक भागवताचार्य नारायणाचार्य high school था, BN High School. वो भी एक प्रकार से charitable ही था। वो कोई ऐसा आजकल का जो education की स्थिति है, वैसी नहीं थी।...तो मेरा वहां स्कूली शिक्षा वहां पर हुई। उस समय यह टेन प्लस टू नहीं था, ग्यारहवीं कक्षा हुआ करती थी। मैंने कहीं पढ़ा था कि चाइनीज फिलॉसफर हुएन संग, वो मेरे गांव में रहे थे, तो उस पर एक फिल्म बनाने वाले थे। तो मैंने उस समय शायद उनकी यहां एंबेसी को या किसी को चिट्ठी लिखी थी कि भाई, आपने मैंने कहीं पढ़ा है कि आप हुएन संग के लिए फिल्म बना रहे हैं। तो मेरे गांव में वो रहते थे। आप उसको भी जिक्र कहीं करना। ऐसा करके मैंने कुछ प्रयास तो किया था। वो बहुत साल पहले की बात है। उसके पहले मेरा, मेरे गांव में एक रसिक भाई दवे करके थे। वे कांग्रेस के लीडर थे, थोड़े समाजवादी विचार के भी थे और मूल वो सौराष्ट्र के थे और मेरे गांव में आकर के बसे थे। वो हम स्कूल को, बच्चों को कहते थे कि देखो भाई, तुम कहीं पर भी जाओ और कोई भी पत्थर तुम्हें मिले, जिस पर कुछ लिखा हुआ हो या कहीं कुछ उस पर नक्काशी की हुई हो, तो वो पत्थर इकट करके स्कूल के इस कॉर्नर में डाल देना। धीरे धीरे वो बड़ा ढेर हो गया था। लेकिन तब मुझे समझ आया कि उनका इरादा यह था कि बहुत पुरातन गांव है। यहां के हर पत्थर में कोई ना कोई स्टोरी है। इकट्ठा करो, जब भी कोई व्यक्ति आएगा तो इसको करेगा। शायद वो कल्पना रही होगी। तो मेरा भी ध्यान उस तरफ गया। 2014 में जब मैं प्रधानमंत्री बना, तो स्वाभाविक दुनिया के लीडर्स एक कर्टसी कॉल करते हैं। तो चीन के राष्ट्रपति, राष्ट्रपति शी, उनका कर्टसी कॉल आया, शुभकामनाएं वगैरह वगैरह बातें हुई। फिर उन्होंने खुद ने कहा कि मैं भारत आना चाहता हूं। मैंने कहा, बिल्कुल, स्वागत है आपका, आप जरूर आइए। तो कहा, लेकिन मैं गुजरात जाना चाहता हूं। मैंने कहा, वो तो और अच्छी बात है। तो उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे गांव बोडनगर जाना चाहता हूं। मैंने कहा, वो क्या बात है? आपने यहां तक का कारखान बना दिया है। बोले, तुम्हें मालूम है क्यों? मैंने कहा, नहीं, मुझे मालूम नहीं। तो बोले, मेरा और तुम्हारा एक स्पेशल नाता है। क्या? हुएन संग जो चाइनीज फिलॉसफर था, वो सबसे ज्यादा समय तुम्हारे गांव में रहा था। लेकिन वापस जब आया चाइना तो मेरे गांव में रहा था। तो बोले, हम दोनों का यह कनेक्ट है।
- 9:00 – 15:55
Student Life
- NKNikhil Kamath
और अगर आप अपने बचपन, बचपन के बारे में और चीजें याद करें। अ... जब आप छोटे थे, क्या आप अच्छे स्टूडेंट थे? आपके इंटरेस्ट क्या थे उस टाइम?
- NMNarendra Modi
मैं, मैं एक बहुत ही सामान्य विद्यार्थी रहा। मैं कोई किसी भी प्रकार से कोई मुझे नोटिस करे, ऐसा नहीं था। लेकिन मेरे एक टीचर थे, बेल्जी भाई चौधरी करके। वो मेरे प्रति बहुत वो रखते थे। तो एक दिन वो मेरे पिताजी को मिलने गए थे। मेरे पिताजी को कह रहे थे, इसके अंदर इतनी टैलेंट है, लेकिन ये कोई ध्यान नहीं केंद्रित करता है। ऐसे ही है, जबान की बातें की चीजें करता रहता है। तो बोले, हर चीज को इतनी जल्दी ग्रास्प करता है, लेकिन फिर अपनी दुनिया में खो जाता है। तो बेल्जी भाई की मुझसे बहुत अपेक्षा थी, मेरे बेल्जी भाई चौधरी की। तो मेरे टीचरों का मुझ पर प्यार बहुत रहता था। लेकिन मुझे ज्यादा पढ़ना, अगर उसमें कॉम्पिशन का एलिमेंट है, तो मैं शायद उससे दूर भागता था। मुझे कोई उसमें रुचि नहीं थी। ऐसे ही परीक्षा पास कर लो भाई, निकाल दो [हँसते] ऐसा ही रहता था। लेकिन और एक्टिविटी मैं बहुत करता था। कुछ भी नई चीज है तो उसको तुरंत पकड़ लेना, ये मेरा नेचर था। [हँसते]
- NKNikhil Kamath
सर, आपके कोई ऐसे बचपन के दोस्त हैं, जो अभी भी आप टच में रहते हैं।
- NMNarendra Modi
ऐसा है कि मेरा, मेरा केस थोड़ा विचित्र है। बहुत छोटी उम्र में मैंने घर छोड़ दिया। घर छोड़ा मतलब सब कुछ छोड़ा मैंने। किसी से मेरा संपर्क नहीं था। तो बहुत बड़ा गैप हो गया। तो मेरा कोई कांटेक्ट नहीं था। किसी से कुछ लेना देना भी नहीं था और मेरी जिंदगी भी एक अनजान, ऐसे ही भटकते इंसान की थी। कोई कौन पूछेगा मुझे? तो मेरा जीवन ही ऐसा नहीं था। लेकिन जब मैं सीएम बना, तो मेरे मन में कोई इच्छा ये जगी। एक इच्छा ये जगी कि मेरे क्लास के जितने दोस्त हैं, पुराने, सबको मैं सीएम हाउस में बुलाऊंगा। उसके पीछे मेरी साइकोलॉजी ये थी कि मैं नहीं चाहता था कि मेरे किसी भी व्यक्ति को ये लगे कि अपने आप को बड़ा तीसमार खामन गया है। मैं वही हूं जो सालों पहले गांव छोड़ के गया था। मुझमें बदलाव नहीं आया है। उस पल को मैं जीना चाहता था। और जीने का तरीका ये है कि मैं उन साथियों के साथ बैठूं।...लेकिन वो चेहरे से भी पहचान नहीं पाता था मैं, क्योंकि बीच में बहुत बड़ा गैप हो गया। वो हर एक के बाल सफेद हो चुके थे, बच्चे बड़े हो गए थे सब। लेकिन मैंने सबको बुलाया। छत्तीस, पैंतीस लोग इकट्ठे हुए थे और रात को बड़ा खाना-वाना खाया, गपशप मारे, पुरानी बचपन की यादें ताजा की। लेकिन मुझे वो बहुत आनंद नहीं आया। आनंद इसलिए नहीं आया कि मैं दोस्त खोज रहा था, लेकिन उनको मुख्यमंत्री नजर आता था। तो वो खाई पटी नहीं और मेरे जीवन में शायद तू कहने वाला कोई बचा ही नहीं। ऐसी स्थिति हो गई। है, सब अभी भी संपर्क में हैं, लेकिन बड़े सम्मान से मेरे प्रति वो लोग देखते रहते हैं। तो एक, एक है, एक टीचर थे, मेरे रास बिहारी मणियार। उनका भी स्वर्गवास हुआ, कुछ समय पहले और वो करीब नाइन्टी थ्री, नाइन्टी फोर थे। वो मुझे चिट्ठी हमेशा लिखते थे, उसमें वो तू लिखते थे। बाकी तो एक इच्छा मैं सीएम बना, तो एक थी कि मैं अपने स्कूल के दोस्तों को बुलाऊं, बुलाया। दूसरी मेरी इच्छा थी, जो शायद हिंदुस्तान के लोगों के लिए अजीब होगा। मेरा मन करता था, मैं मेरे सभी टीचर्स को सार्वजनिक रूप से सम्मान करूंगा। तो मुझे बचपन से जिन्होंने पढ़ाया है और स्कूली शिक्षा तक जो भी मेरे टीचर रहे, मैंने सबको ढूंढा और सीएम बनने के बाद उनका बहुत बड़ा सार्वजनिक सम्मान किया मैंने और हमारे गवर्नर साहब थे, शर्मा जी। वे भी उस कार्यक्रम में आए और गुजरात के सभी लब्धप्रतिष्ठित लोग उस कार्यक्रम में थे। और मैं एक मैसेज मेरे मन में था कि मैं जो कुछ भी हूं, इनका भी कुछ न कुछ योगदान है मुझे बनाने में। कोई मेरा बाल मंदिर के टीचर रहे होंगे, कोई... सबसे बड़ी आयु के टीचर नाइन्टी थ्री ईयर के थे। करीब तीस, बत्तीस टीचर्स को बुलाया था और उनका सबका मैंने सार्वजनिक रूप से सम्मान किया और मेरे जीवन की वो बड़ी अच्छी पल थी, ये मेरे मन में लगता नहीं है। फिर मैंने एक दिन मेरे जीवन में किया। मेरा जो बृहद परिवार था, मेरे भाई, उनके संतान, बहन, उनके संतान, जो भी परिवार के लोग, क्योंकि उनको भी मैं पहचानता नहीं था, क्योंकि मैं छोड़ चुका था। लेकिन एक दिन मैंने मेरे सीएम हाउस में सबको बुलाया। सब परिवारजनों को परिचय किया मैंने कि ये कौन किसका बेटा है, किसकी शादी कहां हुई है? क्योंकि मेरा तो कोई नाता रहा नहीं था। तो तीसरा काम मैंने ये किया। चौथा मैंने जब संघ के जीवन में मैं था, तो शुरू में जिन परिवारों में मैं, मुझे खाना मिलता था, खाना खाने जाता था। कई परिवार थे, जो उन्होंने मुझे खिलाया-पिलाया। कोई जीवन भर मेरा अपना तो कोई खाने की व्यवस्था नहीं थी, ऐसे ही मैं खाता था। तो उन सबको मैंने बुलाया था। तो जिसको कहें कि मैंने अपनी इच्छा से कोई चीजें की, इतने पिछले पच्चीस साल हो गए मुझे, तो ये चार चीजें की। [हँस] मेरे स्कूल के दोस्तों को बुलाया, जिनके घर मैंने खाना खाया था, वो उनको बुलाया। मेरे अपनी फैमिली के लोगों को बुलाया और मैं, मैंने टीचर्स को बुलाया।
- NKNikhil Kamath
अगर आपको, शायद आपको
- 15:55 – 17:36
Chapter 2 - Parallels between Politics & Entrepreneurship
- NKNikhil Kamath
याद नहीं होगा। थोड़े साल पहले बैंगलोर आए थे। स्टार्टअप के लोगों से मिल रहे थे एंड योर लास्ट मीटिंग ऑफ द नाइट, आप हमसे मिले थे एंड दे टोल्ड अस कि यू हैव फिफ्टीन मिनट्स अलोन विद हिम। बट आप एक घंटा बैठे थे। [हंसी] एंड... अगर आपको याद है, तभी भी मैं आपको सवाल ही पूछ रहा था। अह, आई थिंक इट इज इजीयर टू आस्क क्वेश्चन देन गिव आंसर्स। और मैं आपको ऐसी भी चीजें बता रहा था कि, अह, ये जो हो रहा है, शायद अच्छा नहीं है। वो जो हो रहा है, शायद अच्छा नहीं है और आप सुन रहे थे। अह, अगर आप, इफ यू हैव टू थिंक कि देर इज सम कैटेगिरी ऑफ पीपल और सम एज ग्रुप ऑफ पीपल इन सोसाइटी, जिससे आपका कनेक्शन बहुत स्ट्रांग है। अगर आप एज, एक, एक एज ग्रुप डिफाइन कर सकें तो वो कौन सी होगी?
- NMNarendra Modi
तो मेरे लिए बाय एंड लार्ज कहा जाता था कि भाई नरेंद्र भाई को ढूंढना है तो कहां ढूंढोगे? जहां पंद्रह-बीस नौजवानों के बीच में ठाके मारता होगा, तो बोले वहीं खड़ा होगा वो। तो वे भी एक छवि थी मेरी।
- NKNikhil Kamath
हमम।
- NMNarendra Modi
तो इसलिए शायद आज तो मैं स..., हर क्षेत्र से, हर उम्र से दूरी महसूस नहीं करता हूं।
- NKNikhil Kamath
हमम।
- NMNarendra Modi
कनेक्ट वाला शब्द जितना शायद पर-परफेक्ट आंसर तो मेरा नहीं होगा-
- NKNikhil Kamath
हमम।
- NMNarendra Modi
लेकिन दूरी महसूस नहीं करता हूं मैं।
- 17:36 – 20:14
Competition in Politics
- NKNikhil Kamath
जैसे आप कह रहे थे कि आपको कॉम्पिशन अच्छा नहीं लगता। अह, पीपल लाइक जिड्डू कृष्णमूर्ति, अ लॉट ऑफ वेरी इवॉल्व्ड थिंकर्स, वो ऐसी बातें करते हैं कि कॉम्पिशन अच्छा नहीं है। समबडी कमिंग फ्रॉम दैट स्कूल ऑफ थॉट इंटू पॉलिटिक्स, जहां पे बहुत सारा कॉम्पिशन है। वो पॉलिटिक्स में वो सेम आइडियोलॉजी कैसे लेकर आ सकते हैं?
- NMNarendra Modi
देखिए, बचपन में जो कॉम्पिशन नहीं, वो तो आलसीपन होगा, कोई बड़ी फिलोसोफी वगैरह कुछ नहीं होगा।
- NKNikhil Kamath
हमम!
- NMNarendra Modi
... ऐसे ही गैर जिम्मेदाराना व्यवहार जो एक बच्चों का रहता है, वैसा ही होगा मेरा। मैं नहीं मानता, कोई फिलॉसफी मुझे गाइड करती थी, ऐसा मैं नहीं मानता। मुझे लगता है ठीक है, वो ज्यादा नंबर लाएगा, लाएगा। मैं क्या मैं अपना कोई ज्यादा करूं? तो दूसरा मैं सब बंदर का व्यापारी जैसा था जी! जो हाथ लगे समय पर उसको छू लेता था मैं। मानिए, कोई भी ऐसे कॉम्पिशन होगा तो मैं उसमें उतर जाऊंगा। नाट्य स्पर्धा होगी तो उतर जाऊंगा। यानी ये चीजें मैं सहज रूप से कर लेता था। अब मैं, मेरे यहाँ एक मिस्टर परमार करके मेरे टीचर थे। बड़े यानी वो पीटी टीचर कहते हैं, शायद फिजिकल ट्रेनिंग वाले टीचर। तो मेरे यहाँ एक हवेली में एक छोटा सा अखाड़ा था। तो मैं इनसे इतना इंस्पायर हुआ तो मैं रेगुलर जाता था। मलस्तंब सीखता था मैं, उस समय कुश्ती सीखता था।
- NKNikhil Kamath
कुश्ती क्या होता है सर? कुश्ती।
- NMNarendra Modi
कुश्ती और मलस्तंब, जो लकड़ी का एक बहुत बड़ा पिलर होता है। इस पर जो खास करके महाराष्ट्र में वो मलस्तंब होता है।
- NKNikhil Kamath
अच्छा!
- NMNarendra Modi
वैसे वो मैंने शरीर को सुगठित बनाने के लिए उत्तम एक्सरसाइज है। वो एक प्रकार से खंबे पर करने वाला योगा है, एक प्रकार से वो। तो मैं चला जाता था। सुबह पांच बजे उठकर उनके पास चला जाता था मैं, और वो भी मेरे पीछे मेहनत करते थे। लेकिन मैं खिलाड़ी नहीं बना। ठीक है, कुछ समय कई आ छोड़ दिया। ऐसा ही रहा।
- 20:14 – 30:39
Skills required to enter the field of Politics
- NKNikhil Kamath
क्या, क्या ऐसी कोई चीजें हैं, जो राजनीति में एक पोलिटिशियन के लिए टैलेंट मानी जा सकती है? जैसे कि एंटरप्रेन्योरशिप में जब कोई कंपनी स्टार्ट कर रहा है, उसके लिए इनहेरेंटली तीन चार टैलेंट्स चाहिए होते हैं। जैसे कि कोई अच्छे मार्केटिंग करे, कोई अच्छा सेल्स करे, कोई अच्छा टेक्नोलॉजी में हो, जो प्रोडक्ट डेवलप करे। अगर किसी युवा को आज पोलिटिशियन बनना है तो उसमें ऐसी कोई टैलेंट्स है, जो आप परख सकते हैं, ऐसे कि ये होना चाहिए।
- NMNarendra Modi
दो चीजें अलग अलग हैं। पोलिटिशियन बनना वो एक पार्ट है और पॉलिटिक्स में सफल होना वो दूसरी चीज है। तो दो अलग तरीके से। तो एक तो हो गया है राजनीति में आना, दूसरा होना है, सफल होना। मैं मानता हूं कि उसके लिए तो आपका एक डेडीकेशन चाहिए, कमिटमेंट चाहिए। जनता के सुख दुख के आप साथी होने चाहिए। आप एक्चुअली अच्छे टीम प्लेयर होने चाहिए। आप ये कहो कि मैं तिस्मार खां हूं और मैं सबको चलाऊंगा और दौड़ाऊंगा, सब मेरा हुक्म मानेंगे। तो वो हो सकता है उसकी राजनीति चल जाए, चुनाव जीत जाए, लेकिन वो सफल राजनेता बनेगा, गारंटी नहीं है। और देखिए, देश में मैं कभी कभी सोचता हूं। हो सकता है, मैं, मैं जो सोचता हूं, वो विवाद भी पैदा कर सकता है। जब आजादी का आंदोलन चला। उसमें समाज के सब वर्ग के लोग जुड़े, लेकिन सब पॉलिटिक्स में नहीं आए। कुछ लोगों ने अपना जीवन बाद में शिक्षा को दे दिया, किसी ने खादी को दे दिया, किसी ने प्रौढ शिक्षा को दे दिया, किसी ने ट्राइबल की भलाई के लिए ऐसा रचनात्मक कामों में लग गए। लेकिन देशभक्ति से प्रेरित वो आंदोलन था, आजादी का आंदोलन। हर एक के मन में एक जज्बा था। भारत को आजाद कराने के लिए मुझसे जो होगा, मैं करूंगा। आजादी के बाद उसमें से एक लॉट राजनीति में आया। और शुरू में देखिए, राजनीति के बाद हमारे देश में जितने टॉल्वर लीडर्स थे, वो आजादी के जंग से निकले हुए लीडर थे। तो उनकी सोच, उनकी मैच्योरिटी, उसका रूप अलग है, बिल्कुल ही अलग है। इनकी बातें, उनकी बिहेवियर की, जो चीजें सुनने को मिलती है, उसमें एक बहुत ही समाज के प्रति अतिशय समर्पण भाव। और इसलिए मेरा मत है कि राजनीति में निरंतर अच्छे लोग आते रहने चाहिए और मिशन लेकर के आए हैं, एंबिशन लेकर के नहीं। अगर मिशन लेकर के निकले हो तो कहीं ना कहीं तो आपको स्थान मिलता जाएगा। एंबिशन से ऊपर होना चाहिए मिशन। फिर आपके अंदर क्षमता होगा। जैसे महात्मा गांधी! आज के युग के नेता की जो आप परिभाषा देखते हैं, तो उसमें महात्मा जी कहां फिट होते हैं? पर्सनालिटी वाइज़ शरीर दुबला, पतला सा। ऑरेटरी न के बराबर थी। तो उस हिसाब से देखें तो भाई वो लीडर बन ही नहीं सकते थे। तो क्या कारण था कि जीवन बोलता था?... और ये जो ताकत थी, उसने इस व्यक्ति को पीछे पूरे देश को खड़ा कर दिया था। और इसलिए ये जो आजकल ये जो बड़े प्रोफेशनल कैटेगरी में पॉलिटिशियन का रूप देखा जा रहा है, लच्छादार भाषण करने वाला होना चाहिए। ये कुछ दिन चल जाता है, तालियां बज जाती हैं, लेकिन अल्टीमेटली तो जीवन काम करता है। और दूसरा मेरा मत है कि भाषण कला औरेटरी, उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कम्युनिकेशन। आप कम्युनिकेट कैसे करते हैं? अब देखिए, महात्मा गांधी हाथ में अपने से भी ऊंचा डंडा रखते थे, लेकिन अहिंसा की वकालत करते थे। बहुत बड़ा कॉन्ट्रास्ट था, लेकिन कम्युनिकेट करते थे। महात्मा जी ने कभी टोपी नहीं पहनी, लेकिन दुनिया गांधी टोपी पहनती थी। कम्युनिकेशन की ताकत थी। महात्मा गांधी का राजनीति क्षेत्र था, पॉलिटिक्स था, लेकिन राज व्यवस्था नहीं थी। वो चुनाव नहीं लड़े थे, वो सत्ता में नहीं बैठे थे, लेकिन मृत्यु के बाद जो जगह बनी, उसका नाम राजघाट रखा।
- NKNikhil Kamath
और सर, जो आपने अभी कहा है, ये आज के पूरे कन्वर्सेशन का पॉइंट हमारे लिए यही है कि हम वी वांट टू टेल यंग पीपल, कि थिंक ऑफ पॉलिटिक्स एज एंटरप्रेन्योरशिप एंड व्हाट आई एम होपिंग इज एट द एंड ऑफ दिस। एक दस हज़ार यंग स्मार्ट इंडियंस गेट मोटिवेटेड बाय योर लाइफ, गेट इंस्पायर्ड टू ट्राई एंड बी पॉलिटिशियंस इन इंडिया।
- NMNarendra Modi
लाल किले से तो कहा था कि देश को एक लाख ऐसे नौजवानों की जरूरत है जो राजनीति में आएं और मैं मानता हूं कि लेना, पाना, बनना, ये अगर मकसद है तो उसका आयुष्य बहुत लंबा नहीं है जी! एंटरप्रेन्योर के पास जो पहली ट्रेनिंग होती है, ग्रो करने की, यहां पहली ट्रेनिंग होती है खुद को खपा देने की। जो है वो भी दे देने की। वहां पर मैं मेरा, मेरी कंपनी या मेरा प्रोफेशन उसकी नंबर वन कैसे बने? यहां होता है नेशन फर्स्ट। ये बहुत बड़ा फर्क होता है और समाज भी नेशन फर्स्ट की सोच वाले व्यक्ति को ही स्वीकार करता है। और ये राजनीतिक जीवन सरल नहीं होता है जी, जो लोग मानते हैं, ऐसा नहीं होता है। कुछ लोगों के नसीब में है, उनको कुछ नहीं करना पड़ता, उनको मिलता रहता है। लेकिन हो सकता है कोई कारण होंगे। मैं उसमें जाना नहीं चाहता, लेकिन मैं जानता हूं मेरे यहां एक अशोक भट्ट करके हमारे कार्यकर्ता थे। छोटे से घर में रहते थे, जीवन के अंत तक। कई बार मिनिस्टर रहे थे। खुद की कोई गाड़ी वगैरह कुछ नहीं था। और पहले तो मोबाइल फोन हुआ नहीं करते थे, लैंडलाइन होती थी। आप रात में तीन बजे उनको फोन करो, आधी घंटे, आधी घंटे से वो फोन उठाते थे और आप उनको कहोगे कि उस समय मैं तो राजनीति में नहीं था। लेकिन हमारे यहां अहमदाबाद राजकोट हाईवे पर एक्सीडेंट बहुत होते थे। बगोदरा करके जगह है तो सप्ताह में दो तीन दिन मुझे फोन आते थे कि भाई यहां बड़ा एक्सीडेंट हो गया है। तो मैं अशोक भट्ट को फोन करता था और वो कहते हैं, अच्छा! थोड़ी देर में वो निकल जाते थे। खुद के पास गाड़ी वाड़ी कुछ नहीं, वो किसी को पकड़ लेंगे, ट्रक पकड़ लेंगे। जिंदगी पूरी ऐसे जीते थे।
- NKNikhil Kamath
आर यू ऑल्सो सेइंग दैट। कोई युवा ऐसा ना सोचे कि मुझे पॉलिटिशियन बनना है, बट ये सोच के आए कि मुझे पॉलिटिशियन बन के क्या करना है?
- NMNarendra Modi
ऐसा है कि वो ज्यादातर लोग पॉलिटिशियन बनना ऐसा नहीं कहते हैं। वो कहते हैं, मुझे एमएलए बनना है, मुझे कॉरपोरेटर बनना है, मुझे एमपी बनना है। वो एक अलग कैटेगरी है जी। पॉलिटिक्स में आने का मतलब चुनाव लड़ना ही जरूरी थोड़ा है जी! वो तो लोकतंत्र की एक प्रक्रिया है कि मौका मिलेगा, लड़ लीजिए। काम तो है जनसामान्य के दिलों को जीतना। चुनाव तो बाद में जीते जाते हैं और जनसामान्य के दिल जीतने के लिए जिंदगी उनके यहां, उनके बीच में जीनी पड़ती है जी। जिंदगी को उनके साथ जोड़ना पड़ता है और ऐसे लोग हैं, आज भी है देश में।
- NKNikhil Kamath
अगर आप आजकल के पॉलिटिशियंस के बारे में बात करें, जो यंग है, आपको किसी में ऐसी दिखती है लाइक यू सी दैट मच पोटेंशियल इन एनीबडी?
- NMNarendra Modi
बहुत लोग हैं जी, बहुत लोग हैं और बिल्कुल खप जाते हैं। दिन रात मेहनत करते हैं।... मिशन मूड में काम करते हैं जी।
- NKNikhil Kamath
कोई एक आदमी आपके दिमाग-
- NMNarendra Modi
मैं नाम कहूंगा तो कइयों के साथ अन्याय हो जाएगा। तो मेरा दायित्व बनता है कि मैं किसी को अन्याय न करूं। लेकिन मेरे सामने कई नाम हैं, कई चेहरे हैं, कई लोगों की बारीकियां मुझे पता है।
- NKNikhil Kamath
जब
- 30:39 – 38:02
Importance of Ideology and Idealism
- NKNikhil Kamath
आप पहले कह रहे थे कि वो जो लोगों के साथ रहना, फीलिंग फॉर दैम, वो एम्पथी, सिम्पथी। क्या आपके चाइल्डहुड में ऐसी कोई चीजें थी, विच मेड यू लाइक दैट?
- NMNarendra Modi
मतलब?
- NKNikhil Kamath
मतलब जैसे आप कह रहे थे कि पोलिटिशियन जब आप बनना चाहते हैं तो इट्स नॉट अबाउट यू, यू आर सेकेंडरी। जो लोग हैं, जिनके लिए आप पोलिटिशियन हैं, वो बिकॉ, वो पहला बन जाते हैं। आपके चाइल्डहुड में ऐसी कोई चीज थी, जिसके वजह से वो-
- NMNarendra Modi
ऐसा है कि मेरा जीवन मैंने नहीं बनाया है।
- NKNikhil Kamath
हम्म।
- NMNarendra Modi
हालात ने बनाया है। मैं बचपन से जो जिंदगी गुजार करके आया हूं, मैं उसकी गहराई में जाना नहीं चाहता हूं कि अलग मेरी, मेरा बचपन बीता है। लेकिन वो जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है जी। और शायद वो ही मेरा एक प्रकार से सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी थी। मुसीबत यूनिवर्सिटी है मेरे लिए, [हँसते] जो मुझे सिखाती है। और हो सकता है कि मैंने मुसीबत को मोहब्बत करना सीख लिया है, जिसने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। मैं उस राज्य से आता हूं, जहां मैंने माताओं, बहनों को सर पर गड़ा लेकर के दो-दो, तीन-तीन किलोमीटर पानी के लिए जाते देखा है। तब मेरा मन करता है कि आजादी के पचहत्तर साल के बाद, क्या मैं पानी पहुंचा सकता हूं? तो उस संवेदनाओं से पैदा हुई मेरी ये एक्टिविटी है। योजनाएं होगी, पहले भी होगी। मैं योजनाओं को क्लेम नहीं करता। सपने पहले भी लोगों ने देखे होंगे, लेकिन मैं उन सपनों के लिए खप जाता हूं। सपने किसी के भी क्यों न हो, लेकिन वो सपना सही है तो मेरा काम है, मैं खप जाऊं, ताकि कुछ निकले देश के लिए। जब मुख्यमंत्री बना, तो मेरा एक भाषण था और सहज रूप से मैंने कहा था मैं, कि मैं मेहनत करने में कोई कमी नहीं रखूंगा। दूसरा, मैं मेरे लिए कुछ नहीं करूंगा और तीसरा, मनुष्य हूं, गलती हो सकती है, बद इरादे से गलत नहीं करूंगा। और वो मैंने अपने जीवन के मंत्र बनाए हैं। गलतियां होती होंगी, मुझसे भी होती होंगी। मैं भी मनुष्य हूं, मैं कोई देवता थोड़ा हूं। मनुष्य हो तो गलती होती है। बद इरादे से गलत नहीं करूंगा। ये मेरे मन का रहा है हमेशा।
- NKNikhil Kamath
क्या आपको, क्या आपको लगता है कि जो आपकी बिलीफ सिस्टम है, जो आप सबसे अंदर... व्हाट इज मोस्ट इंपॉर्टेंट टू यू? वो बिलीव्स, जो आप बीस साल पहले सोचते थे, अगर आज वो बदल जाए, इज इट अ गुड थिंग और ए बैड थिंग?
- NMNarendra Modi
जैसे?
- NKNikhil Kamath
जैसे कि सोचिए कि मैं आज मैं थर्टी एट का हूं। जब मैं शायद बीस साल का था, मैं सोचता था कि कैपिटलिज्म इज द राइट वे ऑफ द वर्ल्ड। और जब मैं थर्टी एट का बन गया हूं, मे बी आई वांट टू चेंज माय माइंड अपन, चेंज माय माइंड अबाउट इट। बट पीपल होल्ड यू टू व्हाट यू सेड, बीस साल पहले। बट आई फील लाइक इट्स जस्ट एवोल्यूशन और ये ट्रांजिशन है। विद मोर डेटा लोगों के दिमाग में जो वो पहले सोचते थे, वो बदल जाता है। मैं अभी भी कैपिटलिज्म में मानता हूं। मैं ये एग्जांपल ऐसे ही दे रहा हूं। बट क्या आपके ऐसे कोई बिलीव्स थे, जो आप दस साल, बीस साल पहले मानते थे और आज वो आप नहीं मानते?
- NMNarendra Modi
दो चीजें हैं। एक तो कुछ लोग होते हैं जो गंगा का ही गंगा दास, जमुना का ही जमुना दास। बहती गाड़ी में जैसा ही रंग बदलना है, बदलता रहते हैं। मैं वो व्यक्ति नहीं हूं। मैं एक ही विचार से पला बढ़ा हूं। और अगर मेरी उस आइडियोलॉजी को, बहुत कम शब्दों में अगर कहना है तो वो ये है नेशन फर्स्ट। अगर मेरा एक टैगलाइन है नेशन फर्स्ट, तो फिर उसमें जो भी फिट बैठता है, मुझे फिर वो आइडियोलॉजी के बंधनों में बांधता नहीं है। ट्रेडिशंस के बंधनों में बांधता नहीं है। वो मुझे आगे ले जाने के लिए जरूरी होता है, तो मैं करता हूं। पुरानी चीजें छोड़नी है तो मैं छोड़ने के लिए तैयार हूं। नई चीजें स्वीकार करने के लिए तैयार हूं, लेकिन मानदंड क्या? नेशन फर्स्ट। मेरा तराजू एक है। मैं तराजू नहीं बदलता।
- NKNikhil Kamath
अगर मैं इस-इसको थोड़ा और दूसरी तरफ लेकर जाऊं, तो क्या पोलिटिशियन की आइडियोलॉजी होती है, जिसके वजह से उसे फॉलोअर्स मिलते हैं या सोसाइटी की आइडियोलॉजी होती है, जिसको पोलिटिशियन कॉपी करते हैं और उसके वजह से उसको फॉलोअर्स मिलते हैं?
- NMNarendra Modi
आइडियोलॉजी से भी ज्यादा...... idealism का महत्व है। ideology के बिना राजनीति होगी, ऐसा मैं नहीं कहता हूँ। लेकिन idealism आदर्शवाद, इसकी बहुत जरूरत होती है। जैसे आजादी के पहले क्या ideology थी भाई? आंदोलन चलता था।
- NKNikhil Kamath
Freedom!
- NMNarendra Modi
आजादी, वही एक ideology थी। गांधीजी का रास्ता जुदा था, ideology आजादी। सावरकर का रास्ता अपना था, ideology अलग। कौन सी? आजादी।
- NKNikhil Kamath
लोग कहते हैं कि politician बनने के लिए thick skin चाहिए, मोटी चमड़ी। How does one develop this? लोग troll करेंगे, public में आपके बारे में बुरा कहेंगे, आपके बारे में कहानियां बनाएंगे। ये normal आदमी के लिए एक नया experience है। ये कैसे सीख सकते हैं?
- NMNarendra Modi
राजनीति में संवेदनशील लोगों की जरूरत है। किसी का भला हो तो खुशी हो, ऐसे, ऐसे लोगों की जरूरत है। दूसरा विषय है आरोप-प्रत्यारोप। तो ये लोकतंत्र में आपको स्वीकार करके चलना चाहिए कि आप पर आरोप होंगे, भांति-भांति के आरोप होंगे। लेकिन आप अगर सही हैं, आपने गलत नहीं किया है तो आपको कभी भी परेशानी नहीं होती।
- NKNikhil Kamath
और
- 38:02 – 44:10
Social Media and 'Moti Chamdi' in Politics
- NKNikhil Kamath
sir, आपने pre social media politics में आप CM रह चुके हैं और post social media में आप PM हैं। इस दौरान politics कैसे बदला है? आपने दोनों देखे हैं, पहले वाला time और आज का time भी। जब social media ज्यादा important नहीं था और आज जब ये बहुत ज्यादा important हो गया है। अगर आप इसके बारे में कुछ advice दें, एक युवा को, जो politician बनना चाहता है कि इसको कैसे use करते हैं?
- NMNarendra Modi
तो कभी-कभी लोग मुझे पूछते हैं। छोटे-छोटे जब बच्चों को मिलता हूँ ना, तो मुझे ये सवाल पूछते हैं। मुझे भी अच्छा लगता है उनके साथ गप्पे मारना। आठवीं, नौवीं कक्षा के बच्चे कभी आ जाते हैं मिलने के लिए। तो कहते हैं, साहब ये, कभी कोई बच्चा पूछता है, आप खुद को टीवी पर देखते हैं तो कैसा लगता है? ऐसा पूछते हैं। कुछ बच्चे आकर पूछते हैं कि इतनी सारी आपको दिन-रात गालियां पड़ती हैं, आपको कैसा लगता है? तो मैं उनको एक चुटकुला सुनाता हूँ। मैं कहता हूँ, मैं अहमदाबाद ही हूँ। और हमारे अहमदाबाद लोग... की अलग एक पहचान, उनके बहुत चुटकुले चलते हैं। मैंने कहा एक अहमदाबाद ही स्कूटर लेकर जा रहा था और किसी के पास बिल्कुल टक्कर लग जाए ऐसा, तो सामने वाला गुस्से में आ गया। तो वो तू तुम में शुरू हो गई। वो गालियां देने लगा। ये जो अहमदाबाद था, अपना स्कूटर लेकर ऐसे ही खड़ा रहा। वो गालियां देता ही जा रहा था। इतने में कोई आया, बोले यार भाई तुम कैसे इंसान हो? ये गालियां दे रहा है और तुम ऐसे ही खड़े हो। तो कह रहा है, भाई! दे रहा है ना, ले तो नहीं जा रहा ना कुछ। ये अहमदाबाद की typical दे जा रहा है ना, कुछ ले तो नहीं जा रहा ना। तो मैंने भी मन बना लिया कि ठीक है भाई, दे रहे हैं गालियां। उनके पास जो होगा वो देंगे, मेरे पास जो होगा मैं दूंगा। लेकिन आप सत्य के धरातल पर होने चाहिए। आपके दिल में पाप नहीं होना चाहिए। अगर आप वरना, अच्छा कोई मुझे बताए साहब, आप politics में नहीं है। एक office में काम करते हैं। क्या office में ऐसा नहीं होता है क्या? एक विशाल परिवार है और उसमें भी दो भाइयों के बीच में कोई थोड़ा तना तनातनी हुई तो ये होता है कि नहीं होता है। तो जीवन के हर क्षेत्र में ये कम अधिक मात्रा में लेकिन होता तो ही है। और इसलिए उसके आधार पर मोटी चमड़ी के होने के लिए हमें नहीं सोचना चाहिए। अत्यंत संवेदनशील होना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता के बिना आप लोगों का भला नहीं कर सकते जी। और मैं मानता हूँ, ये लोकतंत्र की बहुत बड़ी ताकत है social media. पहले... गिने चुने लोग आपको परोसते थे, आप उसी को सत्य मानते थे। तब भी आप तो फंसे हुए ही थे। आपको कोई verification के लिए अवकाश ही नहीं था कि उसने कहा, एक लाख लोग मर गए तो आप मानते एक लाख लोग मर गए। आज आपके पास alternate है। आप verify कर सकते हैं कि भाई ये बात आई है तो यहां कहां है, यहां कहां है? आपके मोबाइल फोन में हर चीज available है। थोड़ा ध्यान दीजिए, आप बहुत आराम से सत्य के पास पहुंच सकते हैं। और इसलिए democracy को ताकत देने का काम social media से हो सकता है। जो लोग आज विकृतियों के कारण कुछ गलत कर रहे हैं, तो समाज में वैसी सामान्य स्थिति में भी मुझे याद है, जब पहले मैं संगठन का काम करता था। कोई बात न हो, हम जनसंघ के लोगों को तो मैं तो उस समय राजनीति में नहीं था, ऐसी गालियां पड़ती थी। कुछ न किया हो, कुछ भी हो, गालियां पड़ती थी। यहां तक कि अकाल आया तो भी गाली देते थे politician को।... तो उस जमाने में भी ऐसा ही होता था, लेकिन तब वो प्रिंट मीडिया हुआ करता था, तो उसकी उतनी ताकत थी। आज सोशल तो थोड़ा बहुत तो पहले भी था, आज भी है। लेकिन आज आपके पास सत्य खोजने के लिए बहुत बड़ा कैनवास अवेलेबल है, बहुत अल्टरनेट रास्ते ओपन है। और आजकल नौजवान जो है, ज्यादातर इन चीजों को वेरीफाई करता है। देखिए, मैं आजकल कभी-कभी बच्चों को मिलता हूँ। मैं हैरान हूँ, जो स्पेस के विषय में, काफी रुचि नजर आती है। तो चंद्रयान की सफलता ने मेरे देश के नौजवानों में एक नया स्पिरिट पैदा किया है। मुझे कई बच्चे मिलते हैं, वो गगनयान के टाइम टेबल के विषय में उनको पता होता है। सोशल मीडिया की ताकत देखिए, वो फॉलो करता है कि गगनयान का क्या हो रहा है? एस्ट्रोनॉट का क्या हो रहा है? किसकी कहां ट्रेनिंग चल रही है? आठवीं, नौवीं कक्षा के बच्चों को पता होता है। इसका मतलब यह हुआ कि सोशल मीडिया एक प्रकार से नई जनरेशन के लिए एक बहुत बड़ी ताकत भी बन रही है। और मैं, मैं उसको उपयोगी मानता हूं। जब मैं नया-नया राजनीतिक क्षेत्र में आया, तो मैं तो बहुत छोटा था, तो मुझे तो कोई गाली खाने का प्रश्न नहीं आता था, लेकिन ऊटपटांग चीजें मैं सुनता था। तो मुझे लगता था कि ये क्यों ऐसा बोलते हैं लोग? क्यों ऐसा करते हैं? फिर धीरे-धीरे मुझे समझ में आया कि भाई, ये एक क्षेत्र ही ऐसा है, जिसमें आपको जीना है।
- 44:10 – 54:31
Anxiety, Failures & Risk-Taking Ability
- NKNikhil Kamath
आजकल बहुत सारे बच्चे ये कह रहे हैं कि उनको एंग्जाइटी होती है। मुझे भी होती है। अ... एंग्जाइटी मेरे लाइफ में द वे इट प्रेजेंट्स इटसेल्फ इज जैसे मैं आपके साथ बैठ के बातें कर रहा हूं, आई फील नर्वस, आई फील एंग्जियस। मुझे ये लगता है कि पता नहीं मैं क्या बोल दूंगा, आपको कैसे लगेगा? एंड अ... आप, इट्स अ टफ कन्वर्सेशन फॉर मी टू हैव। बहुत सारे बच्चे एंग्जाइटी के बारे में बात कर रहे हैं। ये आपकी जिंदगी में भी आता है और जब आपके बचपन में आता था, आपने इसके साथ किया क्या?
- NMNarendra Modi
आता तो होगा। ऐसा तो नहीं है कि परमात्मा ने कुछ मेरे लिए दरवाजे बंद रखे होंगे। [हँसते] जो हर एक को देते हैं, वो मुझे भी दिया होगा। लेकिन हर एक की अपनी इन चीजों को मैनेज करने की अलग-अलग क्षमता होती है और अलग-अलग स्टाइल होती है।
- NKNikhil Kamath
हमम! कि आप, मुझे अगर मैं ये आपसे सीखना चाहूं तो हाउ डू, हाउ डज वन डू इट?
- NMNarendra Modi
एग्जेक्टली कोई थीसिस के रूप में कहना तो बड़ा कठिन है। लेकिन मैं एक ऐसे पद पर बैठा हूं कि मुझे मेरे इमोशंस को, मेरी ये जो नेचुरल टेंडेंसी मनुष्य की होती है, उन सब से बाहर रहना होगा, सबसे ऊपर रहना होगा। अब जैसे 2002, गुजरात में चुनाव था। मेरी जिंदगी का वो सबसे बड़ा कसौटी थी। वैसे मैं मेरे जीवन में करीब-करीब चुनाव जीतने का अवसर मुझे बहुत मिला है। लड़ा तब भी और लड़ाया तब भी। तो मेरे जीवन में न टीवी देखा, रिजल्ट आ रहे थे, कुछ नहीं। ग्यारह-बारह बजे मेरे घर के नीचे सीएम बंगलो के बाहर ढोल की आवाज आने लगी। [हँसते] और मैंने लोगों को कहा कि बारह बजे तक मुझे कुछ जानकारी मत देना। फिर हमारे ऑपरेटर ने चिट्ठी भेजी कि साहब, आप दो तिहाई बहुमत से आप आगे चल रहे हैं वगैरह। तो मैं नहीं मानता हूँ कि कुछ मेरे भीतर कुछ नहीं हुआ होगा।
- NKNikhil Kamath
हमम!
- NMNarendra Modi
लेकिन उसको ओवर पावर करने वाला मेरे पास कोई थॉट था। तो मेरे लिए वो रेस्टलेसनेस कहो, एंग्जाइटी कहो, अलग हो गया। उसी प्रकार से, मेरे यहां पर पांच जगह पर बम ब्लास्ट हुए। आप कल्पना कर सकते हैं, कैसी स्थिति होगी एक मुख्यमंत्री के नाम से? तो मुझे, मैंने कहा मैं पुलिस कंट्रोल रूम में जाना चाहता हूँ। तो मेरे सिक्योरिटी वालों ने मना कर दिया कि साहब अभी पता नहीं कहाँ क्या पड़ा होगा और आप कहाँ जा रहे हैं? मैंने कहा, जो भी होगा, मैं जाऊँगा। वो बड़े परेशान थे कि आखिरकर कहा मैं, मैं आकर के गाड़ी में बैठ गया। तो वो चलती, मैंने कहा पहले अस्पताल जाऊँगा। नहीं बोले, साहब अस्पतालों में भी बम फूट रहे हैं। मैंने कहा, जो होगा, होगा, मैं जाऊँगा। तो मेरे भीतर उसको आप कह सकते हैं कि रेस्टलेसनेस होगा, एंग्जाइटी होगी। लेकिन मेरा तरीका ये था कि मैं अपने मिशन के साथ खप, खप जाता था।
- NKNikhil Kamath
हमम!
- NMNarendra Modi
तो मैं उसको अलग रूप में अनुभव करता हूँ शायद। मुझे उसमें जिम्मेदारी का भाव आ जाता है। मैं 24 फरवरी 2002 को, जीवन में पहली बार एमएलए बना।
- NKNikhil Kamath
हमम!
- NMNarendra Modi
24 फरवरी 2002।
- NKNikhil Kamath
हमम!
- NMNarendra Modi
...सताइस फरवरी पहली बार मैं असेंबली में गया। जीवन में पहली बार विधानसभा गृह में गया। मेरी एमएलए की आयु तीन दिन थी और अचानक गोधरा में इतना बड़ा कांड की खबर आने लगी। ट्रेन में आग लगी है, धीरे धीरे खबर आई। तो मैं बहुत ही स्वाभाविक, जो भी रेस्टलेस कहो, जो भी क्योंकि मैं चिंतित था। मैं हाउस में था, हाउस में। मैं निकलते ही कहा मैंने कहा कि मैं गोधरा जाना चाहता हूं। तो मैंने कहा, यहां से बड़ौदा जाएंगे, बड़ौदा से हम हेलीकॉप्टर लेंगे। तो बोले हेलीकॉप्टर तो है ही नहीं। तो मैंने कहा, किसी का देखो। तो ओएनजीसी का शायद था, तो सिंगल इंजन था। तो उन्होंने मना कर दिया, वीआईपी को नहीं ले जा सकते। मैंने कहा, मैं वीआईपी नहीं हूं, मैं कॉमन मैन हूं, मैं जाऊंगा। तो बड़ा झगड़ा हुआ हमारा। मैंने कहा, मैं लिखित देता हूं, जो कुछ भी होगा, मेरी जिम्मेवारी है। मैं सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर से जाऊंगा और मैं गोधरा पहुंचा। अब वो दर्दनाक दृश्य, इतने डेड बॉडी है, सब कल्पना कर सकते हैं। मैं भी इंसान हूं, मुझे भी सब कुछ हुआ जो होना था। लेकिन मुझे मालूम था कि मेरे, मैं एक ऐसे पद पर बैठा हूं कि मुझे मेरे इमोशंस को, मेरी ये जो नेचुरल टेंडेंसी मनुष्य की होती है, उन सब से बाहर रहना होगा, सबसे ऊपर रहना होगा। और जो भी कर सकता हूं, करके मैंने कोशिश की अपने आप को संभालने की। पर जैसे मैं परीक्षा पे चर्चा पे स्टूडेंट्स से बात करता हूं, तो मैं उनको सारा उसका लेशन समझाता हूं कि भाई तुम दिमाग में से निकाल दो कि तुम कुछ करने जा रहे हो। तुम्हारी रूटीन एक्टिविटी के हिस्सा बनने ऐसे जाओ। तुम स्पेशल नए कपड़े पहनने की कोशिश मत करो उस दिन।
- NKNikhil Kamath
क्या आप ऐसे सोचते हैं कि वर्स्ट केस क्या होगा? वर्स्ट केस मतलब सबसे बुरी चीज क्या हो सकती है? क्या आप वैसे सोचते हैं?
- NMNarendra Modi
जी नहीं, मैंने कभी ना जीवन का सोचा है, ना मृत्यु का सोचा है। [हँसते] देखिए, मैं हिसाब किताब करके जो चलते हैं ना जिंदगी में, उनके लिए शायद होगा। मैं इसलिए मैं शायद इसका जवाब नहीं दे पाऊंगा। क्योंकि सचमुच में मैं कभी, मैं आज जहां पहुंचा हूं, वहां आने पहुंचने के लिए निकला ही नहीं था जी। इसलिए मुझे पता ही नहीं है कुछ। मैं जब सीएम बना तो मुझे आश्चर्य था कि मैं सीएम कैसे बन गया? तो मेरे जीवन का यह राह नहीं था। दायित्व आया है तो मैं निभा रहा हूं। उसे अच्छे ढंग से करना ही मेरा मकसद रहता है। पर कोई इस काम के लिए चल पड़ा था, ऐसा नहीं है जी। इसलिए मुझे वो हिसाब किताब बैठता नहीं है जी। जो सामान्य जीवन में होता है। मैं शायद इसमें अपवाद हूं, क्योंकि, क्योंकि मेरा बैकग्राउंड ऐसा है कि मैं ऐसा कभी सोच ही नहीं सकता हूं। मैं, मुझे मैंने किसी एक बार किसी ने पूछा था। मेरा बैकग्राउंड ऐसा है कि मैं अगर कोई प्राइमरी स्कूल का टीचर बन जाता, तो मेरी मां ने मोहल्ले में गुड़ बेचा होता, गुड़ खिलाया होता सबको। देखो, मेरा बेटा टीचर हो गया तो मेरा वो बैकग्राउंड था। तो इसलिए मैंने तो कभी ऐसे सपने देखे नहीं थे। इसलिए मुझे कोई ये नहीं होगा तो क्या होगा, ये नहीं होगा तो कैसा होगा? ये सब कुछ चीजें दिमाग में बहुत ज्यादा आती नहीं है जी।
- NKNikhil Kamath
जैसे आज आपने पहले कहा था कि सक्सेस सफलता से ज्यादा फेलियर से सीखने को मिलता है। आप ऐसे कुछ फेलियर्स के बारे में बात करना चाहेंगे?
- NMNarendra Modi
जिस दिन चंद्रयान टू का लॉन्चिंग होने वाला था। मुझे कई लोगों ने कहा था कि साहब नहीं जाना चाहिए। मैंने कहा, क्यों? बोले, साहब, ये तो अनसर्टेन होता है। दुनिया में हर देश फेल जाते हैं। चार-चार, छह-छह बार करने के बाद होते हैं। आप जाएंगे और कुछ हो गया तो? तो मैंने कहा, क्या है? प्रयास लेने की मेरी कोई जिम्मेवारी नहीं क्या? मैं गया और हुआ ऐसा कि चंद्रयान लॉन्चिंग में हम लास्ट सेकंड बिखर गए। सारे वहां बैठे हुए लोग परेशान थे। प्रधानमंत्री को कहने की हिम्मत नहीं थी किसी की। लेकिन मैं टेक्नोलॉजी को जितनी समझता, मैं देख पाता था कि हां, कुछ गड़बड़ लग रही है, नहीं चल रहा है। आखिरकार एक जो सीनियर मोस्ट थे, उन्होंने आकर मुझे कहा कि साहब, चिंता मत कीजिए। सभी को मैं नमस्ते-नमस्ते किया। मैं रात को दो बजे कार्यक्रम था वो। मैं वहां गेस्ट हाउस में गया, लेकिन मैं सो नहीं पाया। मैंने फिर से करीब आधे पौने घंटे के बाद सबको बुलाया। मैंने कहा, देखिए, अगर ये लोग थक ना गए हो तो मैं सुबह सात बजे इनको मिलना चाहता हूं। जाने से पहले क्योंकि देश को बहुत बड़ा सेटबैक था, लेकिन मैं सेटबैक से रोने धोने करके जिंदगी गुजारने वाला मैं नहीं था। मैंने कहा, मैं सुबह गया और सभी साइंटिस्टों को मैंने कहा, अगर कोई फेलियर है तो जिम्मेवारी मेरी है। आपने प्रयास किया, आप निराश मत होइए और मैंने उनका जितना भी आत्मविश्वास जगा सकता हूं, मैंने जगाया और चंद्रयान तीन सफल हुआ।
- 54:31 – 1:01:26
Impact of Policymaking
- NKNikhil Kamath
इससे कोई सीख जो आज आप यूज करते हैं। इस इस इंसिडेंट से ऐसी कोई लर्निंग जो आज आप पॉलिटिक्स में यूज करते हैं।
- NMNarendra Modi
देखिए, पॉलिटिक्स में रिस्क लेने के लिए बहुत तैयारी चाहिए जी।...उसमें हर पल risk लेना। जब मैं एक लाख नौजवानों को कहता हूँ कि आप आइए। और मैं अपना समय भी उनके लिए देना चाहता हूँ, जो ये लोग चाहते हैं। और मुझे लगता है कि देश को अगर ऐसे नौजवान मिल जाएं, तो मेरा twenty forty-seven का जो एक मेरे मन में dream है, वो वो पूरा करेंगे। मैं उनको मेरे लिए काम करने के लिए नहीं बुला रहा हूँ, देश के लिए काम करने के लिए।
- NKNikhil Kamath
अपने politics में बुला रहे हैं।
- NMNarendra Modi
लेकिन, लेकिन उनको fear of unknown जिसको कहते हैं, वो न हो, इसलिए मैं उनका साथ खड़े रहना चाहता हूँ। कि आप चिंता मत करिए, चलिए दोस्तों! और लेना, पाना, बनने के इरादे से मत आइए। लोकतंत्र में राजनीति का बहुत महत्व है, उसको प्रतिष्ठा दीजिए। जितनी ज्यादा प्रतिष्ठा राजनीति को मिलेगी, उतना राजनीति शुद्धिकरण होगा। हम उसको निकम्मा है, गंदा है, तो फिर गंदा है तो फिर गंदा ही आएंगे। हम इसको प्रतिष्ठा दें, अच्छे लोग आने चाहिए। तो मेरी ये कोशिश है।
- NKNikhil Kamath
एक ये एक बात है कि मैं आज यहाँ पे बैठ के बोल रहा हूँ कि और youngsters को politics में आना चाहिए। जब मैं खुद अपने बारे में बात करूं, तो दो चीजें हैं। पहली चीज ये है कि I like my job. मुझे companies में invest करना, stock markets, ये मैं बहुत time, बीस साल से कर रहा हूँ and I really love and enjoy my job. और दूसरी चीज ये है कि as somebody who grew up in a South Indian middle class family, अ... बचपन से ये कहा गया था कि मेरे आगे जो options हैं, doctor या engineer या chartered accountant तब थे। अभी शायद एक startup भी उसमें add कर सकते हैं। But हम सब लोगों के लिए politics is a dirty place. ये इतना ingrained हो गया हमारी psyche में कि ये बदलना बहुत मुश्किल है। और अगर मैं थोड़ा और सच कहूं इसके बारे में, वो politician बनने के बाद वो एक चीज जो मैं बदलना चाहता हूँ, मुझे वो पता भी नहीं कि वो चीज क्या है? तो हम जैसे लोगों के लिए आप क्या करेंगे?
- NMNarendra Modi
मैं, मैं दूसरी तरह से देखता हूँ। आपने जो अपना analysis किया, वो अधूरा है। अधूरा इसलिए है... कि अगर आप जो कह रहे थे, वही होते, तो आज आप यहाँ नहीं होते। आपका एक-एक मिनट, रुपये पैसों का खेल होता। वो सब छोड़ छाड़ करके, दिल्ली की ठंड में आप मेरे साथ अपना दिमाग खपा रहे हो। मतलब कि आप democracy, politics इससे जुड़े हो। politics का मतलब चुनाव नहीं है। politics का मतलब हार जीत नहीं है। politics का मतलब सत्ता नहीं है। वो उसका एक पहलू है। चुने हुए जनप्रतिनिधि कितने होंगे देश में? मान लीजिए दस हज़ार MLA होंगे, एक-दो हज़ार यहाँ। सब लोग तो जीते, लेकिन राजनीति में सब लोगों की जरूरत होती है। दूसरा, आप policymaking में होते हैं, तो बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आप अपनी एक छोटी company में अच्छी चीज करके बदलाव लाए। लेकिन अगर आपका व्यक्तित्व किसी policymaker की जगह पर होगा, राजनीति में होगा, तो आप वो बदलाव पूरे देश में ला सकते हैं। तो सबसे बड़ा advantage ये होता है, शासन व्यवस्था में, कि आप नीतियां बना सकते हैं। नीतियों को execute करके आप स्थितियां बदले से बदल सकते हो और अगर सही... दिशा में हो और नेक ईमानदारी से करते हो तो आपको परिणाम नजर आते हैं। अब जैसे मैं बताऊं, हमारे देश में tribal के लिए तो काम हर सरकार करती आई है। लेकिन हमारे राष्ट्रपति जी द्रौपदी मुर्मू जी, वो समाज के उस तबके से आती हैं, तो मैं जब भी उनसे मिलता था, तो बात emotional हो जाती थी। आदिवासी समाज में भी, वन अति पिछड़े जो लोग हैं, उन तक कुछ पहुंचा नहीं है। और छोटे-छोटे समूह है, बिखरे हुए हैं। उन्होंने मुझे कई बार कहा कि कुछ करना है। मैंने उनसे कहा कि आप मुझे guide कीजिए। तो उनके मार्गदर्शन में मैंने एक scheme बनाई, PM जनमन योजना। अब ये लोग ज्यादा से ज्यादा पच्चीस लाख लोग हैं और वो भी ढाई सौ जगह पे हैं। politician के लिए काम का नहीं है, क्योंकि उसे वोट मिलना नहीं है, जीत हार होनी नहीं है। लेकिन जीवन के लिए बहुत बड़ा है। द्रौपदी जी उस समाज को जानती थी। उन्होंने मुझे आग्रह किया और मैंने PM... और आज जब मैं सुनता हूँ कि साहब वहाँ पहले ये नहीं था, अब ये हो गया, वो नहीं था, हो गया। तो मेरे मन को एक बड़ा satisfaction मिलता है कि जगह का क्या उपयोग हो सकता है, जिसको किसी ने नहीं पूछा।... उसकी पूजा करने का मुझे अवसर मिल गया। तो मैं राजनीति में अगर आप कोई अच्छे निर्णय और सही समय पर निर्णय करते हैं, तो कितना बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं, इसका एक उदाहरण है।
- NKNikhil Kamath
और सर, मैं कोई जर्नलिस्ट नहीं हूँ, न ही मैं एक पॉलिटिकल एक्सपर्ट हूँ। अगर मैं पॉलिसीज के बारे में बात करूंगा तो आई साउंड लाइक एन इडियट। इसके लिए शायद बहुत सारे मोर एक्सपीरियंस लोग हैं। बट
- 1:01:26 – 1:15:18
Stepping out of the Comfort Zone
- NKNikhil Kamath
इफ, इफ आई गो बैक टू फेलियर, क्या आप और दे सकते हैं? और उनसे आपने क्या सीखा, फ्रॉम फेलियर्स? बचपन में भी हो सकता है, सीएम के टाइम में, पिछले दस साल में।
- NMNarendra Modi
वैसे मुझे सेटबैक तो बहुत आए हैं। अब जैसे, मैं छोटा था, शायद प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। मुझे एक्जेक्ट याद नहीं है अभी। और हमारे राज्य में शायद कोई सैनिक स्कूल शुरू हुआ। अब मुझे अखबार पढ़ने की आदत थी, तो अखबार पढ़ना मतलब एडवर्टाइजमेंट भी पढ़ता था। कोई था, [हँसते] बस पढ़ना मतलब पढ़ना। तो मेरे गांव में लाइब्रेरी थी, लाइब्रेरी में चला जाता था। तो मैंने ये सैनिक स्कूल का पढ़ा। तो फिर शायद उस समय एक रुपया का मैनिफोल्डर करके वो सारा मंगवाया मैंने। वो सब अंग्रेजी में इतना बड़ा आया, हमें कुछ आता नहीं था। तो मेरे यहाँ एक रास बिहारी मणियार करके, हाई स्कूल के प्रिंसिपल थे, लेकिन मेरे घर से कोई तीन सौ चार सौ मीटर दूरी पर रहते थे। तो जाते-आते उनका घर देखते थे और हमें बचपन में तो बहुत बड़े लगते थे हमें। तो एक दिन मैं उनके घर पहुंच गया। मैंने कहा, मुझे समझ नहीं आता है, अगर कोई मुझे समझाए तो। अब वो बड़े दयालु थे। तो कहा, तुम चिंता मत कर बेटा, मैं तुम्हारी चिंता करूंगा। तो उन्होंने सारा देखा और मुझे कहा, देख ये स्कूल है, सैनिक स्कूल है। ऐसा उसका एक इंटरव्यू होता है, एग्जाम होता है, पास होता है, अगर जाते हैं तो। बाद में मैंने मेरे पिताजी को कहा। तो मेरे पिताजी ने कहा, नहीं-नहीं, हमारे पास पैसे-वैसे नहीं है, कहीं जाना-माना नहीं है, अपने गांव में ही रहो। अब वो मेरे मन में पता नहीं एक सैनिक स्कूल लेने बहुत बड़ी चीज होती है, देश के लिए। नहीं कर पाया। तो मुझे लगता है कि शायद वो पहला ही मेरे मन में एक सेटबैक आया, कि मैं ये भी नहीं कर सकता हूँ। यानी जीवन में मैं ऐसे एक-एक चीज देखूं। मुझे याद है, मैं मेरे मन में इच्छा थी, साधु जीवन जीने की इच्छा भारी, कि मैं नहीं कर पाया। मेरा पहला प्रयास तो था कि मैं रामकृष्ण मिशन में अपने आप को जोड़ूं। स्वामी आत्मस्थानंद जी ने जो सौ साल उनके जीवन रहा, अभी स्वर्गवास हुआ। उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ कहा है, स्वामी आत्मस्थानंद जी ने, क्योंकि मैं उनके पास रहा। लेकिन रामकृष्ण मिशन के कुछ नियम थे। मैं उस क्वालिफिकेशन में बैठता नहीं था। तो मैं वहां फिट नहीं हुआ। तो मुझे मना कर दिया गया, लेकिन मैं निराश नहीं हुआ। मेरे लिए मेरा सपना अधूरा रह गया, लेकिन मैं निराश नहीं हुआ। मैं सेटबैक ही था मेरे जीवन में। ऐसे ही भटकता रहा। फिर और कहीं कुछ संतों-महंतों को ढूंढता रहा। वहां भी कुछ सफलता नहीं मिली, एक प्रकार से मैं कह सकता हूँ। तो फिर लौट कर आ गया। शायद नियति ने कुछ ऐसे ही सोचा होगा कि मुझे, इस राह पर ले गई नियति। तो जीवन में सेटबैक तो आते ही हैं।
- NKNikhil Kamath
और ये सेटबैक्स ने आज आपकी पर्सनालिटी में एक महत्वपूर्ण पार्ट प्ले किया है। जैसे आपकी पर्सनालिटी आज है और उनसे आपने क्या सीखा?
- NMNarendra Modi
मैं बताता हूँ। [हँसते] मैं जब आरएसएस में काम करता था, तो उस समय एक नई-नई पुरानी जीप ली आरएसएस वालों ने। तो मुझे ड्राइविंग आता था। यानी सीखा था मैंने नया-नया। अब मैं ट्राइबल बेल्ट में हमारे एक संघ के अधिकारी को लेकर के ट्रैवल कर रहा था। तो उकाई डैम से हम वापस आ रहे थे। तो काफी ढलान थी। तो मैंने सोचा पेट्रोल बच जाएगा। तो मैंने गाड़ी बंद कर दी और जाएगा नीचे, गाड़ी तो चली जाएगी। मुझे ज्ञान नहीं था कि इसके कारण मेरी मुसीबत कैसी आएगी। व्हीकल अनकंट्रोल हो गया। ब्रेक लगाएं तो भी मुसीबत थी, क्योंकि तेज गति एकदम से पकड़ ली। मशीन बंद किया हुआ था, तो कोई कंट्रोल ही नहीं था। बच गए, लेकिन मेरे बगल वालों को भी पता नहीं चला कि मैंने ऐसा पाप किया है। लेकिन बाद में मैंने सीखा कि भाई ये खेल बंद करो। तो सीखते हैं, हर गलती से सीखते हैं। तो मैं बिल्कुल साफ मानता हूँ कि अनुभवों से ही जिंदगी का जितना ज्यादा संवरना होता है, वो अनुभव से होता है। और मेरा सद्भाग्या रहा है कि मैं-...एक comfort zone में जिंदगी मैंने बिताई नहीं। हमेशा comfort zone के बाहर ही रहा और जब comfort zone से बाहर रहा तो मुझे पता था कि मुझे कैसा करना है, कैसे जीना है।
- NKNikhil Kamath
ऐसी कोई, ऐसी कोई specific reason, is there a reason कि आज भी आज आप ऐसे सोचते हैं कि आपको comfort zone में नहीं रहना है?
- NMNarendra Modi
मैं शायद unfit हूं comfort के लिए, [हँसते] ऐसा ही लग रहा है।
- NKNikhil Kamath
But आपने ऐसे भी सोचा है कि क्यों? आपको क्यों लगता है कि आप unfit हैं comfort के लिए?
- NMNarendra Modi
मैं जिस जीवन को जी करके आया हूं ना, इसलिए मुझे बहुत बड़ी चीजें हैं मेरे लिए। मैं मुझे छोटा सा भी मेरे मन को संतोष देता है, क्योंकि मेरा जीवन का जो बचपन का जो व्यक्ति का एक मन तैयार हो जाता है। उससे वो by and large उसको लगता है कि संतोष है, by and large लगता है संतोष है।
- NKNikhil Kamath
क्या आपको ऐसा भी लगता हो सकता है कि comfort comes in the way of achieving your end goal?
- NMNarendra Modi
ज्यादातर तो मैं मानता हूं कि जीवन में कई लोग विफल इसलिए होते हैं कि वो comfort zone के आदी हो जाते हैं। जो लोग comfort zone से even, even एक बड़ा उद्योगपति भी अगर risk नहीं लेता है, comfort zone से बाहर नहीं आता है, उसके comfort zone के level अलग होंगे। तो कालक्रम पे वो खत्म हो जाएगा। उसको बाहर आना ही पड़ेगा और जो जीवन के किसी भी क्षेत्र में प्रगति करना चाहता है, उसने comfort zone का आदी नहीं बनना चाहिए। Risk लेने की उसकी जो मनोभूमिका है, हमेशा, हमेशा उसका driving force होती है।
- NKNikhil Kamath
और यह entrepreneurship में भी same thing है। जो ज्यादा risk ले सके, he does better. क्या अ... sir, आपकी life में आपकी risk taking ability, time के साथ बढ़ रही है?
- NMNarendra Modi
मुझे लगता है मेरी जो risk taking capacity है, उसका अभी full utilization हुआ ही नहीं है। बहुत कम हुआ है। मेरी बहुत risk taking capacity शायद अनेक गुना ज्यादा होगी। इसका कारण है कि मुझे परवाह ही नहीं है। मैंने अपने विषय में कभी सोचा ही नहीं है जी। और जो खुद के लिए नहीं सोचता है, उसके पास risk taking capacity का कोई यानी बेहिसाब होती है। मेरा केस ऐसा है। [हँसते]
- NKNikhil Kamath
अगर आप आज के दिन-
- NMNarendra Modi
आज मैं ये नहीं हूं, कल ये नहीं रहूंगा तो मेरा क्या होगा? कोई लेना देना ही नहीं है मेरा।
- NKNikhil Kamath
अगर आज आपके दिन में किसी चीज के बारे में नहीं सोचे। Zero fear, not afraid of anything और एक ऐसा decision लें, जो आप otherwise नहीं ले रहे हैं because of structure, construct, government, all of that. वो एक चीज क्या होती है?
- NMNarendra Modi
कि शायद मेरी और विधाएं समाप्त हो चुकी हैं। One life, one vision जैसा हो गया है। इसलिए शायद मुझे... लेकिन एक चीज मैं पहले करता था, जो कभी-कभी मेरा मन अभी भी करता है। मेरा एक कार्यक्रम होता था। और मैंने उसको नाम दिया था। "मैं मुझको मिलने जाता हूं", "मैं मुझको मिलने जाता हूं।" यानी कभी-कभी हम खुद को ही नहीं मिलते। दुनिया को तो मिलते हैं, खुद को मिलने के लिए समय ही नहीं है। तो मैं क्या करता था? साल में कोई समय निकाल के तीन-चार दिन, मेरी जितना जरूरत है, उतना सामान लेकर के चल पड़ता था और उस जगह पर जाकर रहता था, जहां कोई मनुष्य न हो। कहीं पानी की सुविधा मिल जाए बस, ऐसी जगह मैं ढूंढता था, जंगलों में कहीं। उस समय तो ये मोबाइल फोन वगैरह कुछ था ही नहीं। अखबार वखबार कुछ सवाल नहीं उठता था। तो वो जीवन का मेरा एक अलग आनंद होता था। वो मैं कभी-कभी miss करता हूं।
- NKNikhil Kamath
और उस दौरान आपने कुछ सीखा अपने बारे में कि जब आप अपने साथ थे, अकेले में। अ... philosophy में जैसे कि बहुत लोग कहते हैं कि the most important, interesting question in life is why am I, how I am? क्या आपने कुछ सीखा अपने बारे में in that time कि आप ऐसे क्यों हैं?
- NMNarendra Modi
अपने आप में खो जाना, बस यही एक बात है। एक उदाहरण बताता हूं इससे क्या हुआ? शायद eighties का कालखंड होगा। मैंने तय किया कि मैं रेगिस्तान में रहूंगा। तो मैं चल पड़ा, लेकिन रेगिस्तान में मैं भटकता ही गया, भटकता ही गया, लेकिन एक दीया दिखता था, लेकिन मैं पहुंच ही नहीं पाता था। तो कोई मुझे कैमल वाला मिल गया। बोले, "भाई तुम क्या कर रहे हो यहां पर?" मैंने कहा, "भई मैं रेगिस्तान में अंदर जाना चाहता हूं।" उसने कहा, "ऐसा करो-... अभी मेरे साथ चलो। वो जो सामने लाइट दिखती है, वो एक आखिरी गांव है। मैं तुम्हें वहां तक छोड़ देता हूं। रात को वहां रुक जाना और सुबह फिर कोई वहां से तुम्हें मिल जाए, तो तुम मुझे ले गया। कोई गुलबेग करके मुस्लिम सज्जन थे, उनके यहाँ ले गया। अब वो छोटा सा गांव धोरोडो, जो पाकिस्तान की सीमा पर भारत का आखिरी गांव है। होता है बीस-पच्चीस घर और सभी मुस्लिम परिवार। तो आतिथ्य सत्कार तो हमारे देश में है ही। उन्होंने कहा, "भाई बच्चे, तुम आओ भाई!" मैंने कहा, "नहीं, मुझे तो जाना है।" तो बोले, नहीं जा सकते रेगिस्तान में भी, तुम्हें अंदाजा है, माइनस टेम्परेचर होगा। तुम कैसे रहोगे वहां? अभी रात को यहां सो जाओ, तुम्हें सुबह दिखाएंगे। खैर, रात को मैं उनके यहाँ रुका। उन्होंने खाना-वाना खिलाया। मैंने कहा, "भई मुझे तो अकेले रहना है, कुछ चाहिए नहीं मुझे।" बोले, तुम अकेले रह ही नहीं सकते। तुम्हें यहां एक हमारा छोटा सा झोपड़ी है, तुम वहां रहो। और दिन में चले जाना तुम रण में, रात को वापस आ जाना। मैं गया, वो व्हाइट रण था और कल्पना बाहर का। वो एक दृश्य ने मेरे मन को इतना छू लिया, जो चीजें मैंने मेरे हिमालयन लाइफ में अनुभव की थी, बर्फ की चट्टानों के बीच में जिंदगी गुजारना। यहां मैं वही दृश्य अनुभव कर रहा था और मुझे एक स्पिरिचुअल फीलिंग आता था। लेकिन वो जो दृश्य मेरे मन में था, जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने वहां एक रणोत्सव बड़ा इवेंट बना दिया और आज वो टूरिज्म का बहुत बड़ा डेस्टिनेशन बन गया है और अभी ग्लोबली बेस्ट टूरिस्ट विलेज का उसको दुनिया में नंबर वन इनाम मिला है उसको।
- 1:15:18 – 1:20:05
Personal Relationships
- NKNikhil Kamath
अगर सोचिए कि कल आपकी जिंदगी में एक ऐसी, ऐसा इवेंट हो, जिससे आपको सबसे ज्यादा खुशी मिले, तो पहला कॉल आपका किसको जाएगा?
- NMNarendra Modi
ऐसा है कि मैं जब श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा झंडा फहराने गया था। और पंजाब में फगवाड़ा के पास हमारी यात्रा पर अटैक हो गया। गोलियां चली। काफी लोग, पांच या छह लोग मारे गए, काफी लोग इंजर्ड हुए। तो पूरे देश में एक तनाव था कि क्या होगा? श्रीनगर लाल चौक में जा रहे हैं। तब तो तिरंगा झंडा फहराना भी बड़ा मुश्किल था। लाल चौक में तिरंगा झंडे को जला दिया जाता था। तिरंगा झंडा ज फहराने के बाद हम जम्मू आए। तो मैंने जम्मू से मेरा पहला फोन मेरी मां को किया था। मेरे लिए वो एक खुशी की पल थी और दूसरा मन में था कि मां को चिंता होती होगी कि गोलियां चली हैं और ये कहां गया है? तो मुझे याद है कि मैंने पहला फोन मां को किया था। मुझे उस फोन का महत्व आज समझ आता है। वैसा मुझे फीलिंग और मैं कहीं आया नहीं।
- NKNikhil Kamath
टू लूज ए पेरेंट! जैसे आप, यू लॉस्ट ए पेरेंट रिसेंटली। आई लॉस्ट माय डैड रिसेंटली। आपने मुझे खत भी लिखा था। थैंक यू, वेरी काइंड। अ... आपकी दिमाग में पहली चीज क्या आती है? जैसे मैं अपना एग्जांपल दूं तो व्हेन आई लॉस्ट माय डैड, द फर्स्ट थॉट इन माय माइंड वाज गिल्ट। कि मैंने ये क्यों नहीं किया? मैंने जाकर और टाइम स्पेंड क्यों नहीं किया उनके साथ? व्हाई डिड आई पिक मे बी वर्क, मे बी दिस, दैट और द अदर ओवर हिम। जब आपकी लाइफ में ये इवेंट, इवेंट हुआ तो आपने क्या सोचा?
- NMNarendra Modi
ऐसा है कि वैसा मेरे जीवन में नहीं है, क्योंकि मैं बचपन में घर छोड़ चुका था। तो घर के लोगों ने भी मान लिया था कि हमारा नहीं है। मैंने भी मान लिया था कि मैं घर के लिए नहीं हूं। तो मेरा जीवन वैसा रहा। इसलिए उस प्रकार का अटैचमेंट किसी को भी फील होने का कारण नहीं था। लेकिन, जब हमारी माताजी का सौ साल हुआ, तो मैं मां को पैर छूने के लिए गया था। अब सौ साल की उम्र, मेरी मां पढ़ी-लिखी नहीं थी। उनको कुछ भी पढ़ा वो ज्ञान नहीं था यानी अक्षर ज्ञान नहीं था। तो मैंने जाते-जाते कहा कि मां! मुझे तो निकलना पड़ेगा। मेरा काम है, मेरे लिए कुछ... तो मैं हैरान था। मेरी मां ने दो वाक्य कहे। बड़े ही यानी एक, जिसको कभी स्कूल का दरवाजा नहीं देखा, वो मां कहती है, "काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से।" अब ये वाक्य उनके मुंह से निकलना...... ये मेरे लिए बड़ा अनेक प्रकार से बहुत बड़ा खजाना था। काम करो बुद्धि, गुजराती में बोल रही थी वो, लेकिन उसका मतलब ये था काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से। तो मैं सोचता था कि परमात्मा ने इस माँ को क्या कुछ नहीं दिया होगा? क्या विशेषता होगी? तो कभी लगता है कि मैं इसके पास कभी रहता तो मैं शायद ऐसी बहुत सी चीजें निकाल सकता था, जान सकता था। तो कमी महसूस होती है। ऐसा मेरा संवाद बहुत कम हुआ क्योंकि मैं जाता था साल में एक दो बार। अच्छा, माँ कभी बीमार नहीं हुई। माँ को और कभी जाता था तो भी पूछती थी मुझे कि भई! तुम्हें काम होगा, जाओ जल्दी तुम। अरे, इस प्रकार का उनका नेचर था। [हँसते]
- 1:20:05 – 1:28:50
Politics and Money
- NKNikhil Kamath
तो सर, मैं पॉलिटिक्स में फिर से आ रहा हूँ। पहले आपने बताया कि पॉलिटिक्स डर्टी नहीं है। हिस्ट्री ने बताया कि पॉलिटिशियंस शायद पॉलिटिक्स को डर्टी बनाते हैं एंड दिस इज स्टिल द प्लेस फॉर आइडियालिस्टिक पीपल इफ दे वांट टू चेंज, चेंज द इकोसिस्टम। दूसरा सवाल, पैसे इन पॉलिटिक्स। अगर हम टू द यूथ ऑफ द कंट्री वी से जॉइन पॉलिटिक्स, उनके दिमाग में सेकंड प्रॉब्लम जो आता है कि इसके लिए बहुत पैसे चाहिए और ये हमारे पास नहीं है। इसके बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे? अ, मेरे लाइफ में स्टार्टअप इंडस्ट्री में, जहां पर मैं काम करता हूं, जब हमें एक आइडिया आता है, हम दोस्तों से, फैमिली से पैसे लेते हैं। इसको हम सीड राउंड कहते हैं। पॉलिटिक्स में ये कैसे होगा?
- NMNarendra Modi
मुझे बचपन की घटना याद है। मेरे गांव में एक डॉक्टर वसनभाई परीख थे। अच्छे डॉक्टर थे आंखों के। और सेवाभावी थे, अच्छे ओरेटर भी थे और हिंदी में भी अच्छा बोलते थे। गुजराती भी ऐसा बोलते थे। उन्होंने एक बार इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ना तय किया। और हम सब वानर सेना जिसको कहे बाल सेना, वो भी झंडा लेकर घूमते थे। मोटा मोटा मुझे याद है। उन्होंने लोगों से एक-एक रुपए लिया था, चुनाव लड़ने के लिए। और फिर उन्होंने सार्वजनिक सभा में हिसाब दिया था कि कितना पैसा मिला और शायद वो ढाई सौ रुपया खर्च हुआ था उनका चुनाव में। और बहुत कम वोट से जीते थे, लेकिन जीत गए थे। तो ऐसा नहीं है कि समाज सत्य को नहीं जानता है। आप में धैर्य चाहिए, आपका समर्पण चाहिए। दूसरा, ये कॉन्ट्रैक्ट का भाव नहीं चाहिए कि मैं इतना करता हूं तो मुझे वोट मिलने चाहिए। फिर आप सफल नहीं होते जीवन में। इसलिए मैंने कहा राजनीति को ये जो चुनाव एमएलए, एमपी इसी में बांध करके रखा है, बाहर निकले। हम समाज जीवन के साथ जुड़े हुए किसी भी काम से लग जाएं, वो राजनीतिक प्रभाव पैदा करता ही करता है। कोई अगर एक छोटा सा आश्रम भी चलाता है, बच्चियों की शिक्षा का काम करता है, स्वयं चुनाव नहीं लड़ता है, लेकिन उसके प्रयासों का एक परिणाम होता है कि राजनीतिक परिणाम निकलते हैं। और इसलिए राजनीति को बहुत बड़े कैनवास पर देखने की आवश्यकता है। और कभी-कभी तो मैं कहता हूं, डेमोक्रेसी में वोटर स्वयं भी इन ए वे पॉलिटिशियन है। वो अपना वोट देता है, तब अपना माइंड अप्लाई करता है, इसको दूं, इसको न दूं। जिसको न दूं, उसके प्रति उसके मन में कोई भाव पड़ा है। जिसको दूं, उसके लिए मन में भाव पड़ा है। इसलिए डेमोक्रेसी में, मेरे केस में मैं अनुभव करता हूं कि मुझे, भले मैं राजनीति में हूं, लेकिन जो सो कल्ड पॉलिटिशियन जिसको कहते हैं, वैसा मैं नहीं हूं। चुनाव के समय ही मुझे ये राजनीतिक भाषण करने पड़ते हैं। ये मेरी मजबूरी है। मुझे अच्छा नहीं लगता है, लेकिन करना पड़ता है। एक ऐसी मजबूरी है। मेरा पूरा समय चुनाव के सिवाय, गवर्नेंस में होता है। और जब मैं सत्ता में नहीं था तो मेरा पूरा समय संगठन में होता था, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट में। मैं अपने कार्यकर्ताओं के जीवन को घड़ने के लिए खपा रहता था। किसको वक्तृत्व स्पर्धा कैसे करनी, प्रेस नोट कैसे लिखना, मास मोबिलाइजेशन कैसे करना? मैं एक-एक चीज में लगा रहता था। मैं फलाने ढीकना भी ऐसा वो बनाना है, उस चक्कर में नहीं पड़ता था। और यहां भी आपने देखा होगा, जब मैं गुजरात में था। जैसे मैं मेरे सामने विषय, मैं नया मुख्यमंत्री बना था। तो मेरे सामने एक काम था भूकंप का। तो मैं भूकंपग्रस्त इलाके में गया। आकर के मैंने अफसरों की मीटिंग की। उनको पूछा, मैंने कहा भाई, तब तक भूकंप को नौ महीने हो चुके थे। मैं अक्टूबर महीने में गया था।... तो उन्होंने कहा, साहब मार्च महीने तक यह होगा। मैंने कहा, भाई, यह मार्च महीना तुम्हारे दिमाग में जो यह सरकारी जो ईयर है, बजट के कारण, फाइनेंसियल ईयर उससे बाहर निकलो। मुझे बताओ, छब्बीस जनवरी के पहले क्या करोगे? क्योंकि देश छब्बीस जनवरी को आकर के देखेगा कि एक साल में क्या हुआ। तो हमारा टारगेट, इसलिए मैंने कहा, मुझे दिसंबर एंड का टारगेट दो। तो अफसरों ने, फिर मैंने कहा कि चलिए भाई, फोर्टी थ्री तालुकस थे। मैंने कहा, हर अफसर एक तालुका का इंचार्ज और आप उस ब्लॉक के चीफ मिनिस्टर हो। जाइए और वहां मुझे काम करके दिखाइए। फ्राइडे को जाना है, मंडे को मैं पूछूंगा क्या किया? सब जाकर के वापस आए। पहली मीटिंग हुई। मीटिंग में कहते हैं, साहब यह तो हो ही नहीं सकता। मैंने कहा, क्यों? बोले, साहब नियम ऐसा है कि मैं कहा, नियम किसने बनाया? तो बोले, हमने बनाया। मैंने कहा, अब आपको जमीन पर गए तो आपको पता चला कि सामान्य मानवी की मुसीबत क्या है। मैंने कहा, अब नियम बदलो और सारे नियम उन्हीं लोगों ने बदले और तेजी से काम हुआ। और जब जनवरी महीने में देशभर के दुनिया भर का मीडिया वहां गया, तो उसने लगा कि भाई तो अब मैं वहां पॉलिटिक्स नहीं कर रहा था। मैं टीम स्पिरिट से सबको मोटिवेट करते हुए एक परिणाम की तरफ ले जा। मैं अनुभवी नहीं था, मैं नया था। मुझे सरकार चलाने का कोई ज्ञान नहीं था। मैं यहां दिल्ली में आया तो दिल्ली में मैंने मेरे सचिवों को एक दिन बुलाया। मैंने कहा, मेरी एक इच्छा है, आप करोगे काम? बोले, नहीं ना, आप सब बताइए जो। मैंने कहा कि आप सब लोग अपने परिवार के साथ दो तीन दिन की छुट्टी लीजिए। तो उनको लगा ये प्राइम मिनिस्टर छुट्टी क्या? मैंने कहा, लेकिन छुट्टी में काम करना है। आप जब आईएएस अफसर बने और पहली जो जॉब की थी, जिस गांव में वहां जाइए। दो रात वहां रुकिए, अपने बच्चों वगैरह ले गया और अपनी पत्नी को, बच्चों को बताइए कि भाई इस ऑफिस में मैं बैठता था। यहां पंखा भी नहीं था। एंबेसडर गाड़ी एक थी, तो चार लोग जाते थे। सारा दिखाओ और फिर आकर हम बात करेंगे। गए सब लोग आए। मैंने कहा, साहब आप हो आए? बोले, साहब हो आए। पुराने लोग मिले, बोले, मिले। मैंने कहा, मेरा आपसे एक बड़ा गंभीर सवाल है, आपको। जिस जगह पर आप गए, नौकरी की शुरुआत की, पच्चीस साल पहले, तीस साल पहले। आप तो वहां से यहां पहुंच गए। पच्चीस साल पहले जो गांव था, वैसा ही है कि बदला हुआ है। उनको सबको चोट पहुंची। उनको लगा, हां साहब, वो तो वैसे के वैसे हैं। मैंने कहा, मुझे बताइए कौन जिम्मेवार? तो मैंने उनको कुछ बुरा बुरा नहीं कहा। मैंने उनको मोटिवेट किया, रियलिटी से परिचित करवाया। उनको दुनिया को ले गए हम वापस पच्चीस साल पहले। तो मेरा काम करने का तरीका, मुझे कभी किसी को अपशब्द नहीं कहना पड़ता, किसी को डांटना नहीं पड़ता है। मैं इसे इन तरीकों से काम लेता हूं।
- 1:28:50 – 1:31:20
Chapter 3 - Governance and Global Politics
- NKNikhil Kamath
और अगर आप ऑर्गनाइजेशन के बारे में बात करें तो एंटरप्रेन्योरशिप, स्टार्टअप, बिजनेस में जब साइकिल अच्छा चल रहा हो तो लोग बहुत सारे लोगों को हायर करते हैं। फिर मार्केट स्लो डाउन हो जाता है या साइकिल बदलता है और उन्हें बहुत लोगों को फायर करना पड़ता है। आपने हमेशा से कहा है मिनिमम, मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस। क्या यह हमारी सरकार हैव वी बीन एबल टू अचीव दिस टू अ सर्टन एक्सटेंट? यह कैसे चल रहा है?
- NMNarendra Modi
आपको सही लगेगा। हमारी यहां मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस का कुछ लोगों ने ना समझी में अपने अपने अर्थ निकाले। कुछ लोगों को लगा कि मंत्रियों की संख्या कम, मतलब मिनिमम गवर्नमेंट। कुछ लोगों को लगा कि कर्मचारियों की संख्या मतलब मिनिमम गवर्नमेंट। मेरी यह कल्पना कभी नहीं थी। ऊपर से मैंने तो आकर के स्किल मिनिस्टर अलग बनाई, कोऑपरेटिव मिनिस्टर अलग बनाई, फिशरीज मिनिस्टर अलग बनाई। तो देश में जिन जिन फोकस एरिया होते हैं, उसके लिए जब मैं मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस कहता हूं, हमारी यहां जो प्रोसेस चलती है, लंबी एक क्लीयरेंस लेना है तो छह छह महीने चल रहा है। एक का कोर्ट कचहरी का मामला है तो सौ सौ साल तक पुराने केस भी लटके पड़े हैं। इसलिए हमने क्या किया? करीब चालीस हज़ार कंप्लायंस हमने निकाल दिए। वरना यह डिपार्टमेंट आपसे यह चीज मांगेगा। बगल वाला भाई आपसे वही चीज मांगेगा, तीसरा भी वही मांगेगा। भाई एक ने मांग लिया है ना, आप उपयोग करो ना। चालीस हज़ार कंप्लायंस, हिंदुस्तान के सामान्य मानवी को कितना बर्डन होता है? मैंने करीब करीब पंद्रह सौ कानून खत्म किए हैं। मैंने क्रिमिनल चीजों से जोड़ने वाले कानूनों को बदला है। तो मेरी जो मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस का कल्पना है, वो ये है और मैं आज देख रहा हूं कि ये सब चीजें हो रही
- 1:31:20 – 1:38:09
India's Global Standing in Tech
- NMNarendra Modi
है।
- NKNikhil Kamath
... Sir, India Stack, जैसे कि हम direct beneficiary हैं इसके, UPI, e-KYC, Aadhaar। क्या आपको लगा था जब इसका conception हुआ था कि it will play out in the manner that it did?
- NMNarendra Modi
आज मैं तीस second में, तीस second में दस करोड़ किसानों के खाते में सीधे पैसे भेज सकता हूं। मैं आज देश के तेरह करोड़ गैस सिलेंडर के उपभोक्ताओं को subsidy के पैसे एक click से तीस second में भेज सकता हूं। क्यों? जन धन account किसी को लेकर कम होता, लेकिन देश के करोड़ों रुपए जो leakage होता था, जो भ्रष्टाचार होता था, वो गया और technology का एक उपयोग हुआ। अब UPI आप देखिए, पूरी दुनिया के लिए अजूबा है ये। दुनिया के मेहमान आते तो पूछते हैं कि भाई UPI कैसे काम करता है? मैं उनको कहता हूं, जरा किसी vendor के यहां हो आओ भाई। Fintech की दुनिया में और technology को democratize कैसे किया जाता है? ये दुनिया के सामने भारत ने एक उदाहरण पेश किया है। आज देश के नौजवानों के जेब में एक मोबाइल फोन हो, उसे किसी चीज की जरूरत नहीं है। और मेरे देश के नौजवान याद रखेंगे, कभी न कभी कि एक ऐसी सरकार आई थी, जो पूरी दुनिया मेरे जेब में थी, मेरे मोबाइल में थी। Technology driven century है। देश ने separate innovation के लिए commission बनाया है। मैंने innovation के लिए अलग fund निकाला है। नौजवान risk ले, उसको लगना चाहिए, भाई भले मैं फेल जाऊंगा तो भी कोई, मैं भूखा नहीं मरूंगा। कोई है मेरी चिंता करेगा। मैं एक बार गया था... ताइवान। तो मेरा, मेरा स्वभाव एक student का है। मेरे भीतर कोई चीज एक है, quality, तो मैं कह सकता हूं विद्यार्थी मेरे अंदर जिंदा है। तो मैं वहां सब नेताओं से मिला, मैं वहां और मैं इतना प्रसन्न था कि जितने भी इनके leader थे, अगर transport का minister था तो उसने दुनिया की best university में transport में PhD किया हुआ था। यानी जिस विषय का वह minister था, उस विषय का वो top most university का वो PhD किया हुआ व्यक्ति था। यह चीज मेरे मन को बड़ा प्रभाव कर गया। मेरे देश में भी मैं ऐसा youth चाहता हूं, जो देश को उस level पर ले जाए। वही ताइवान में मैं गया था तो मेरा एक interpreter था। वो qualified engineer था और अच्छा पढ़ा-लिखा था। तो interpreter के रूप में वहां की सरकार ने मेरे साथ लगाया था और मेरी दस दिन का tour था ताइवान का। मैं उस सरकार के मेहमान था। यह भी मेरे मुख्यमंत्री बनने के पहले की बात है। तो आखिर के दिनों में उसने मुझे पूछा कि साहब, मैं एक बात पूछना चाहता हूं, अगर आप बुरा ना मानें तो। नहीं, नहीं, मैंने कहा, भैया, आप इतने दिनों से साथ रहे, बुरा क्या माने? आप पूछिए ना। नहीं, नहीं बोले, आपको बुरा लग जाएगा। नहीं, नहीं, नहीं। वो टालता रहा। मैंने कहा, ऐसा मत करो भाई, तुम्हारे मन में कुछ है, तुम पूछो। तो उसने मुझे पूछा कि साहब, क्या अभी भी हिंदुस्तान में काला जादू चलता है? अभी भी हिंदुस्तान में सांप-सपेरे होते हैं, अभी भी। उस बेचारे के मन में हिंदुस्तान की यह छवि थी। इतने दिन मैं उसके साथ रहा। मैं technology की चर्चाएं करता था, फिर भी उसके मन में ये था। मैंने उसको मजाक में लिया। मैंने कहा, देखिए भाई, अब तो हमारा, हमारे पूर्वज तो सांप के साथ खेल खेलते थे, हम लोग नहीं खेल पाते। हम mouse के साथ खेलते हैं और मैंने कहा, मेरे देश का हर बच्चा mouse के साथ। मैंने कहा, मेरे देश की ताकत उस mouse में है। वो सांप-सपेरे वाला हिंदुस्तान अलग था।
- NKNikhil Kamath
एक चीज है जो सभी लोग मानते हैं कि India का जो perception है, यह entrepreneurship में भी common है कि marketing एक company बनाने का बहुत बड़ा हिस्सा होती है। आपने India का perception outside of India बहुत बदला है। क्या आप इसके बारे में कुछ tips दे सकते हैं, जो एक entrepreneur सीख सके?
- NMNarendra Modi
पहली बात यह है कि यह claim करना कि मैंने बदला है, वो सही नहीं है। मेरा मत यह है कि दुनिया में जो भी व्यक्ति जाता है, वो सरकार जिसको भेजती है, वो राजदूत है। ये जाते हैं, वो राष्ट्रदूत हैं। अगर हम इनको on board लेंगे तो हमारी ताकत अनेक गुना बढ़ जाएगी। तो आपने देखा होगा, हमने जो नीति आयोग बनाया है, उसकी जो शुरुआती जो हमारे objectives हैं, उसमें एक objective यह है कि विश्वभर में फैले हुए भारतीय समुदाय की सामर्थ्य को जोड़ना, लिखित है। तो मैं सुविचारित मेरा मत है कि विश्व में जो यह सामर्थ्य है, उन सबको जोड़ना चाहिए। दूसरा, मैं मुख्यमंत्री बना, उसके पहले भी मेरा विदेशों में जाना बहुत हुआ था और तब तो मैं संगठन के लोगों के बीच में ही रहता था, उनके बीच में जाता था, तो मैं उनकी ताकत से परिचित था और मेरे contacts भी थे। कभी मुझे अटल जी के कहने पर एक काम के लिए भी मैं गया था, तो मैं, काफी मुझे सफलता मिली थी उसमें।... तो ये, ये ताकत का उपयोग पहले होता नहीं था। मैंने उसका उप चैनलराइज करना शुरू किया। तो दुनिया के राजनेताओं को भी लगने लगा कि ये तो बहुत बड़ा फोर्स है, बड़ी ताकत है। दूसरा उनको देखा कि भाई ये मिनिमम क्राइम अगर कहीं है तो हिन्दुस्तानियों में है। वेल एजुकेटेड हैं तो हिंदुस्तानी हैं। कानून को मानने वाले लोग हैं तो हिंदुस्तानी लोग हैं। तो एक ऑनर का भाव बढ़ने लगा। इन सबके क्युमुलेटिव इफेक्ट जो हुआ है, उसके कारण आज देश का प्रोफाइल बढ़ता चला जा रहा है।
- NKNikhil Kamath
और मैं ये ऐसे ही नहीं कह रहा हूं सर,
- 1:38:09 – 1:46:38
India’s Global Marketing and Geopolitics
- NKNikhil Kamath
जब मैं मेरे बचपन में, जब मैं बैंगलोर में पढ़ रहा था, फोर्टीन, फिफ्टीन, सिक्सटीन। बीस साल पहले, पच्चीस साल पहले, तब ऐसा लगता था कि वो एक आदमी जो कॉलेज गया, अमेरिका गया, पीएचडी की और माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी कर रहा है या ऐसी कोई कंपनी में, दैट वाज द हाईलाइट! उससे बढ़कर हम लोगों के लिए कुछ नहीं था। बट मैं ये कह सकता हूं कि आज मैं जब मिलता हूं, अठारह साल के लड़कों से, वो भी नहीं है। ये लोग इंडिया में बिल्ड करने की बात कर रहे हैं। ये लोग बाहर जाकर कॉलेज की बात बहुत कम कर रहे हैं, तब से कंपैरिजन में। तो दिस इज अ बिग चेंज और ये मैंने देखा है। और सर, अगर आप अगेन यू टेक द एग्जांपल ऑफ एंटरप्रिन्योरशिप वर्सेस पॉलिटिक्स, कॉम्पिशन इज अ गुड थिंग इन माय वर्ल्ड। क्या आपकी दुनिया में भी कॉम्पिशन अच्छी बात है?
- NMNarendra Modi
मैं इसको थोड़ा दो, तीन, चार अलग अलग चीजें बताना चाहूंगा। मैं पब्लिकली कहता था कि आप पछताओगे अगर हिंदुस्तान वापस नहीं आओगे तो। हो सके उतना जल्दी एक पैर तो रख दो, युग बदलने वाला है। ऐसा मैं कहता था। और मुझे याद है जब बीच में आपने मुझे सवाल पूछा था, सेट बैक। मैं मुख्यमंत्री था, एक डेमोक्रेटिक इलेक्टेड गवर्नमेंट का और अमेरिकन सरकार ने मुझे वीजा देने से मना कर दिया था। व्यक्ति के जीवन में तो मेरे लिए कोई अमेरिका जाना नहीं जाना, कोई बड़ी चीज थी। मैं पहले भी जा चुका था, बहुत मेरे। लेकिन एक इलेक्टेड गवर्नमेंट और एक स्टेट का अपमान और देश का अपमान है, मैं फील करता था और मुझे मन में कसक थी कि क्या हो रहा है? जस्ट कुछ लोगों ने झूठ चला दिया, इसलिए ये निर्णय हो गए। दुनिया में ऐसे ही चलती है दुनिया। मेरे मन में एक भाव था, लेकिन उस दिन मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मैंने कहा कि आज अमेरिकन गवर्नमेंट ने मेरा वीजा रद्द किया है। जो कहना था, मैंने कहा, लेकिन मैंने एक बात कही। मुझे कुछ सवाल पूछा गया। मैंने कहा, देखिए, मैं अब ऐसा हिंदुस्तान देखता हूं... कि दुनिया वीजा के लिए लाइन में खड़ी रहेगी। ये दो हज़ार पांच का मेरा स्टेटमेंट है और आज दो हज़ार पच्चीस में हम पहुंच रहे हैं। मैं बोल रहा हूं। तो मुझे दिखता भी है कि अब समय भारत का है। मेरा यूथ जो है, मेरा देश का कॉमन मैन है। मैं अभी कुवैत गया तो मैं वहां लेबर कॉलोनी में गया था। तो सब मजदूर परिवारों से मिल रहा था। ये मजदूर वो हैं, जो दस, दस, पंद्रह, पंद्रह साल पहले वहां गए हुए हैं। तो अब शादी-विवाह में घर आते होंगे, उससे ज्यादा उनका नाता नहीं है। एक मजदूर ने मेरे से कहा, वो बहुत कोई इंटीरियर इलाके में था। बोले, हमारे यहां इंटरनेशनल एयरपोर्ट कब होगा? कुवैत में मजदूरी करने वाला, पंद्रह साल पहले हिंदुस्तान छोड़ के गया हुआ इंसान, अपने डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का ड्रीम देखता है। ये एस्पिरेशन जो है ना, वो मेरे देश को ट्वेंटी फोर्टी सेवन में विकसित बनाएगा। आज भारत के हर यूथ में ये एस्पिरेशन है।
- NKNikhil Kamath
ऐसा लग रहा है कि आज पूरी दुनिया वॉर की तरफ चल रही है। जैसे कि यूक्रेन एंड रशिया, फॉर एग्जांपल। जब ऐसे देशों में इंडियन नेशनल होते हैं और आप इंडिया के प्रधानमंत्री की, की डेजिग्नेशन से उनके लिए रिस्पॉन्सिबल इन अ वे हैं, तो आप इसके बारे में कुछ बोल सकते हैं। लाइक कैन यू बिल्ड ऑन दिस? क्या होता है, इन सिचुएशंस में, क्या हो रहा है? शुड बी वी वोरिड अबाउट व्हाट इज हैपनिंग इन द वर्ल्ड।
- NMNarendra Modi
विश्व के अंदर हमारे प्रति विश्वास है। कारण क्या है? हमारा दोगुलापन नहीं है। हम जो कहते हैं, साफ कहते हैं। जैसे इस क्राइसिस के समय हमने लगातार कहा है कि हम न्यूट्रल नहीं हैं। मैं लगातार कहता हूं, हम न्यूट्रल नहीं हैं। जो लोग कहते हैं कि हम न्यूट्रल हैं, मैं न्यूट्रल नहीं हूं। मैं शांति के पक्ष में हूं। मेरा पक्ष है शांति और मैं उसके लिए जो प्रयत्न होगा, उसमें साथ दूंगा। मैं ये बात रशिया को भी बताता हूं, मैं बात यूक्रेन को भी बताता हूं। ये मैं ईरान को भी बताता हूं। मैं पैलेस्टाइन को भी बताता हूं, इजराइल को भी बताता हूं। और उनको मेरी बात पे ये भरोसा है कि मैं जो कह रहा हूं, वो सच कह रहा हूं। और उसके कारण भारत की क्रेडिट बड़ी है। तो जैसे देशवासियों को है कि संकट होगा तो जरूर मेरा देश मुझे संभाल लेगा।... वैसा दुनिया को भरोसा है कि भाई भारत कहता है, मतलब वो मानता है। देखिए, जब कोरोना की स्थिति आई, तब हमारे नौजवान भारत के, वहीं पर थे, जहां सबसे पहले ये घटना घटी। अब उनको वापस लाना था। तो मैंने एयरफोर्स के लोगों को कहा, "भई देखिए, ये संकट का काम है। वॉलंटरी जो आगे आएंगे, मैं उनको ये काम दूंगा।" सब पे सब आगे आए, फौज के लोग। यानी एक प्रकार से मौत को साथ लेकर के चलना, वैसा ही था। वो लेकर के आए। भगवान की कृपा से कोई नुकसान नहीं हुआ। पाकिस्तान के लोगों को भी लाए, नेपाल के लोगों को लाए, बांग्लादेश के लोगों को लाए। तो मेरे मन में भाव यही है भाई, मेरा देशवासी, उसको मुसीबत हो तो कौन उसकी चिंता करेगा? मुझे बराबर याद है, ये घटना मुझे सुनी है। नेपाल में भूकंप आया। यहां से लोगों को भेजा, नेपाल से भूकंप में। किसी ने मुझे बताया कि तीन-चार दिन के बाद, जब विमान नेपाल से हिंदुस्तान के लोगों को लेकर के आ रहा था, क्योंकि जाता था सामान लेकर के, आता था लोगों को लेकर के वापस। ऐसे ही हमने वो किया। तो एक सज्जन हवाई जहाज में खड़े हुए। पूरा जहाज भरा हुआ था। उन्होंने कहा कि मैं एक डॉक्टर हूं। मैं जीवन भर सरकार को गालियां देता रहता हूं। जो भी सरकार हो, हर गाली को देता हूं। सरकार ये टैक्स लेती है, इनकम टैक्स लेती है, डिकना लेती है, फनाला लेती है। मैं बोले, मुझसे जहां बोलने का मौका मिला, मैं बोलता रहा। लेकिन आज मुझे समझ आई कि उस टैक्स की कीमत क्या होती है। आज जो मैं जिंदा वापस जा रहा हूं। आप देशवासियों की दुनिया में कहीं पर भी सेवा करते ना, तो उसके दिल में भी अच्छाइयां जगती है जी। वो भी कुछ अच्छा करना चाहता है और मैं अनुभव कर रहा हूं। अब आप मुझे अबू धाबी में जाऊं और मैं वहां, उस समय क्राउन प्रिंस थे, उनको कहूं कि एक मंदिर के लिए जगह अगर आप देंगे तो अच्छा होगा। एक पल का विलंब किए बिना इस्लामिक कंट्री में मुझे मंदिर बनाने के लिए जगह लिए अनुमति मिल जाए। आज करोड़ों हिंदुओं को कितना आनंद हो रहा है कि चलो भाई देशवासी!
- 1:46:38 – 1:55:00
Chapter 4 - Conclusion (& some fun)
- NKNikhil Kamath
जैसे हम दूसरे देशों के बारे में बात कर रहे हैं। अगर मैं थोड़ा डाइग्रेस करूं और पूछूं कि अ... मेरा फेवरेट फूड अगर आप पूछें, तो पिज़्ज़ा है और पिज़्ज़ा इटली से है। और लोग कहते हैं कि आपको इटली के बारे में इंटरनेट पर बहुत कुछ पता है। आप इसके बारे में कुछ कहना चाहेंगे? आपने ये मीम्स नहीं देखे हैं।
- NMNarendra Modi
नहीं, वो तो चलता रहता है। मैं उसमें अपना टाइम खराब नहीं करता हूं। [हँस] ऐसा है कि मैं, मैं जिसको कहें खाने के शौकीन लोग-
- NKNikhil Kamath
हाँ।
- NMNarendra Modi
वैसा नहीं हूं।
- NKNikhil Kamath
बिल्कुल नहीं?
- NMNarendra Modi
बिल्कुल नहीं। इसलिए जो भी परोसा जाता है, जिस देश में जाता हूं, मुझे वो मैं बड़े चाव से खाता हूं। लेकिन मेरी कमनसीबी ऐसी है कि आज मुझे किसी आप रेस्टोरेंट में ले जाओगे-
- NKNikhil Kamath
हम्म।
- NMNarendra Modi
और मुझे मेनू देकर के आप कहोगे कि सेलेक्ट करो, तो मैं नहीं कर पाऊंगा।
- NKNikhil Kamath
सर, क्या आप जा पाओगे, रेस्टोरेंट?
- NMNarendra Modi
मैं अभी तो नहीं जा पाया, मैं गया ही नहीं हूं।
- NKNikhil Kamath
कितने साल हो गए?
- NMNarendra Modi
बहुत साल हो गए। [हँस]
- NKNikhil Kamath
जब बाहर आप-
- NMNarendra Modi
पहले मैं जब संगठन का काम करता था, हमारे अरुण जेटली जी खाने के बड़े शौकीन थे।
- NKNikhil Kamath
हाँ।
- NMNarendra Modi
उनको हिंदुस्तान के किस शहर में, कौन से रेस्टोरेंट में, कौन सी चीज बढ़िया है, वो पूरी एनसाइक्लोपीडिया थी।
- NKNikhil Kamath
हम्म।
- NMNarendra Modi
तो हम बाहर जाते थे, तो उनके साथ एक इवनिंग तो भोजन कहीं किसी रेस्टोरेंट में होता था। लेकिन आज अगर कोई मुझे मेनू दे दे-
- NKNikhil Kamath
हम्म।
- NMNarendra Modi
और सेलेक्ट करें, मैं नहीं कर सकता। क्योंकि कभी वो नाम जो मैं पढ़ता हूं और वो डिश जो है, तो वो सेम चीज है, मुझे ज्ञान नहीं है। अज्ञान है मुझमें, क्योंकि मेरी वो, वो टेन्डेंसी बनी नहीं। तो मुझे ज्यादा इसकी समझ नहीं है। तो मैं हमेशा अरुण जी को, "भैया, अरुण जी ऑर्डर आप कर दीजिएे।" मेरा इतना ही रहता था, वेजीटेरियन चाहिए। [हँस]
- NKNikhil Kamath
मैंने आपके थोड़े दोस्तों से बातें की। अ... दोस्तों या लोग जो आपको दस, बीस साल से ऊपर से जानते हैं और उनसे मैंने पूछा, ऐसी चीजें बताएं जो पब्लिक डोमेन में नहीं है। मैं उनके नाम नहीं लूंगा। उन्होंने मुझे एक फोटो भेजा, जहां पे थोड़े चीफ मिनिस्टर की स्वेरिंग इन सेरेमनी चल रही है। चेयर पे थोड़े सीनियर पॉलिटिशियंस बैठे हैं, आप नीचे बैठे हैं। अ... जब मैंने भी वो फोटो देखा, एट थर्टी एट, मुझे सिर्फ वो टाइम याद है जब आप प्राइम मिनिस्टर थे या गुजरात के चीफ मिनिस्टर थे। उस टाइम से पहले वाले का कोई इमेजरी मेरे दिमाग में नहीं आता है। तो व्हेन आई लुक्ड एट द पिक्चर, आई वाज लुकिंग एट इट अगेन एंड अगेन। अगर आप बता सकें कि ये चेंज, वहां से यहां, यहां मतलब आपको कोई...... तू बोल नहीं सकता। शायद एक आपके टीचर जिनके बारे में आपने बातें की। ये कैसे होता है? लाइक आई एम-
- NMNarendra Modi
दो चीजें हैं। बोल नहीं सकता तू, ए ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं।
- NKNikhil Kamath
कोई बोलता नहीं।
- NMNarendra Modi
मुझे तू सुनने को मिलता नहीं है। वो बोल नहीं सकता, ऐसा अर्थ निकालना सही नहीं है। लेकिन मुझे कभी वो सुनने को मिलता नहीं है, क्योंकि जीवन ऐसा बन गया। दूसरा, पद बदला होगा, परिस्थितियां बदली होगी, व्यवस्थाएं बदली होगी। मोदी वही है जो कभी नीचे बैठता था। और इसलिए मुझे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। और यह मैं शब्दों में नहीं कह रहा हूं। यह रियलिटी है जी, मैं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है, कोई फर्क नहीं पड़ता।
- NKNikhil Kamath
और सर, अगर आपको याद है तो पिछले साल मैंने आपके आगे एक स्पीच दिया था, वाइब्रेंट गुजरात में जब आप भी थे। मैंने इतना बुरा किया कि उसके बाद मैंने एक स्पीच कोच लिया और एक साल से मैं सीख रहा हूं, क्लासेस जा रहा हूं। मेरा एक टीचर है। आप ये इतनी अच्छी तरह से कैसे करते हैं? कुछ टिप्स दे सकते हैं। लाइक दिस इज समथिंग एवरीबडी वांट्स टू लर्निंग।
- NMNarendra Modi
दो तीन अलग अलग चीजें हैं। एक तो मेरे लिए बहुत बार पूछा जाता है कि आप तो गुजराती हैं, हिंदू, हिंदी कैसे बोल लेते हैं? मुझे कई लोग पहले जब मैं संघ का काम करता था, तो यही मानते थे कि मैं तो उत्तर भारत का हूं, लेकिन गुजरात में आकर के रहता हूं। इसका कारण यह था कि हम रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे। तो मेरा गांव मेहसाणा, महे, महे ने भैंस। मेहसाणा का मतलब होता है भैंस। तो मेरे गांव से भैंस जब दूध देना शुरू करती है तो उसको मुंबई ले जाते थे और मुंबई में वो दूध का व्यापार करते थे। दूध देना बंद करते थे, तो फिर वापस गांव आते थे। तो ये कारोबार करने वाले लोग उत्तर प्रदेश के होते थे। तो वो जब आते थे तो मालगाड़ी उनको जब मिले, उसका इंतजार करते थे। फिर मालगाड़ी मिलने के बाद पूरी घास से उसको भर देते थे और उसके अंदर चार भैंस खड़ी रहे, ऐसी व्यवस्था रखते थे। तो ये तीस चालीस इस प्रकार के लोग हमेशा वहां रेलवे प्लेटफार्म पर होते थे। तो चाय मैं बेचता था, तो मैं चाय उनको पिलाने जाता था। तो उनसे मुझे बात करनी पड़ती थी बचपन में। तो उनसे बातें करते-करते मैं हिंदी सीख गया। ये जो भैंस का व्यापार करने के लिए आते थे, तो वो तो, वो भी मजदूर ही होते थे, लेकिन शाम को भजन-वजन कीर्तन करते रहते थे। हम चाय मंगवाते थे, हम चाय के तो हम भी हिंदी बोलना सीख गए।
- NKNikhil Kamath
क्या ये बहुत डिफरेंट है सर। जैसे कि आप गुजरात में बड़े हुए थे, आज आप दिल्ली में रहते हैं। इन दोनों में, इन दोनों सिटीज में रहना आपके लिए पर्सनली बहुत डिफरेंट है?
- NMNarendra Modi
हम कहां सिटी में रहते हैं भाई, हम तो घर के खोले में पड़े रहते थे। घर से ऑफिस, ऑफिस से घर। बाहर की दुनिया से तो हम कट ऑफ हो जाते हैं। ये सरकारी व्यवस्था ऐसी होती है तो वो, वो, वो अंतर करना तो बड़ा मुश्किल होता है।
- NKNikhil Kamath
पर ये मेरा आखिरी क्वेश्चन है सर, मैंने आपकी कुछ-
- NMNarendra Modi
लेकिन आपका दूसरा एक सवाल था, इसका एक ओरेटरी का।
- 1:55:00 – 2:06:20
Concluding Views and Vision for the Youth
- NKNikhil Kamath
और सर, अगर आप जो भी आप, आपने लाइफ में सीखा है, इतना एक्सपीरियंस है आपका। अगर आप इसी नॉलेज के साथ अपने ट्वेंटी ईयर ओल्ड वर्जन को कुछ बोल सकें, एक चीज तो आप क्या बोलेंगे?
- NMNarendra Modi
जो नौजवान है, मैं उनको उपदेश देने के लिए अपने आप को योग्य नहीं मानता। और न ही आदेश देने का मुझे कोई हक है। पर मैं इतना कहूंगा कि मेरा मेरे देश के नौजवानों के प्रति...... बहुत भरोसा है। एक गांव का बच्चा, मैं नौकरी नहीं करूंगा, मैं स्टार्टअप करूंगा। तीन स्टार्टअप फेल हो जाएंगे। मुझे याद है, मैंने पहली स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस की, तब तो स्टार्टअप शब्द भी हमारे देश में नया था। लेकिन मुझे पता था कि इसकी ताकत क्या है। तो एक बेटी, मैंने कुछ स्टार्टअप जिन्होंने शुरू किया तो उनको अपने अनुभव सुनाने के लिए कहा था। तो एक बेटी खड़ी हुई, तो बोले, मैं अपना अनुभव बताती हूं। वो बोले, वो बंगाली थी, कोलकाता की थी। बोले, मैंने स्टार्टअप शुरू किया। मैं अपनी मां को मिलने गई और मैंने कहा, मैंने तो नौकरी छोड़ दी है। तो बोले, क्या करोगी? तो बोले, मैंने स्टार्टअप शुरू किया है। स्टार्टअप! सर्वनाश। ऐसा बड़ा ड्रामेटिक वे में उसने पेश किया था। एक समय था कि स्टार्टअप मतलब सर्वनाश। आज स्टार्टअप की एक प्रतिष्ठा बन गई है, एक क्रेडिट बन गई है। और इसलिए मैं मानता हूं कि छोटे से गांव में भी फेलियर भी होगा, तो लोग उसको आदर्श मानेंगे। यार, दम वाला बच्चा है, कुछ कर रहा है।
- NKNikhil Kamath
और सर, अगर मैं आपसे एक सवाल पूछूं कि ऐज पीएम, आपका सेकंड टर्म, फर्स्ट टर्म से कैसे अलग था? और अभी थर्ड टर्म, सेकंड टर्म से कैसे अलग है?
- NMNarendra Modi
पहली टर्म में तो लोग मुझे भी समझने की कोशिश करते थे और मैं भी दिल्ली को समझने की कोशिश कर रहा था। पहले और दूसरे टर्म में, मैं बीते हुए कल के संदर्भ में सोचता था कि पहले यहां थे, अब यहां जाएंगे। पहले इतना होता था, अब इतना करेंगे। तीसरे टर्म में मेरी सोच का दायरा बदल चुका है। मेरा हौसला ज्यादा बुलंद हो चुका है। मेरे सपनों का विस्तार हो चुका है। मेरे अरमान बढ़ते चले जा रहे हैं। कहने का तात्पर्य है कि मुझे ट्वेंटी फोर्टी सेवन विकसित भारत मतलब कि भाषण नहीं है जी। एक-एक चीज को समस्याओं से मुक्ति, टॉयलेट हंड्रेड परसेंट हो जाना चाहिए, बिजली हंड्रेड परसेंट होनी चाहिए, नल से जल हंड्रेड परसेंट हो जाना चाहिए। सामान्य मानवी को अपनी सरकार से मांगने के लिए भीख मांगनी पड़े क्या? ये कोई अंग्रेजों का राज है क्या? उसका हक है। हंड्रेड परसेंट डिलीवरी होनी चाहिए, हंड्रेड परसेंट लाभार्थियों को होनी चाहिए, हंड्रेड परसेंट बेनिफिट पहुंचने चाहिए। कोई भेदभाव नहीं होगा और वही तो सच्चा सामाजिक न्याय है, वही सच्चा सेक्युलरिज्म है। तो उन चीजों पर मैं बल देता रहता हूं। और उसका ड्राइविंग फोर्स है एस्पिरेशन इंडिया। मेरे लिए एआई का मतलब है एस्पिरेशन इंडिया। और इसलिए अब मैं सोचता हूं कि मेरा ट्वेंटी फोर्टी सेवन में यहां है, तो मैं दो हज़ार पच्चीस में यहां हूं, तो अभी कितना बाकी रहा? पहले सोचता था, पहले से कितना आगे ही निकला। अब सोच रहा हूं, यहां हूं, कल तक कहां पहुंचूंगा? तो अब मेरे दिमाग में ट्वेंटी फोर्टी सेवन के संदर्भ में ही मेरी सोच विचार चलता है। तो मेरा तीसरा टर्म, दो टर्म से अनेक गुना अलग है। बिल्कुल बदलाव है और एक बहुत बड़े सपने वाला है।
- NKNikhil Kamath
और सर, इज देर अ प्लान बियोंड यू? इज देर यूथ दैट यू हैव फेथ इन दैट यू आर ट्रेनिंग, इन कल्केटिंग। आज के लिए नहीं, बट बीस साल के बाद, तीस साल के बाद।
- NMNarendra Modi
मैं तो देख रहा हूं कि बहुत ही पोटेंशियल लोग हैं। मैं जब गुजरात में था तो मैं कहता था कि मैं भाई सरकार भले चलाता हूं, लेकिन नेक्स्ट ट्वेंटी इयर्स के लिए मैं लोग तैयार करके जाना चाहता हूं। और मैं वो कर रहा हूं और ये मेरा दाई... मेरी सफलता इसमें है, मैं मेरी टीम कैसे तैयार करूं, जो चीजों को संभाल ले। ये मेरा, मेरे लिए, अपने लिए मापदंड है।
- NKNikhil Kamath
और सर, आखिरी क्वेश्चन मेरे से। पॉलिटिशियन बनने के मिनिमम रिक्वायरमेंट्स इतने ज्यादा नहीं हैं। दे शुड बी अबाउट द एज ऑफ ट्वेंटी फाइव, नो कन्विक्शन ऑफ मोर देन टू इयर्स, वोटर आईडी। ये बहुत, बहुत छोटे रिक्वायरमेंट हैं। तो व्हाट आई विश सर, इज आफ्टर दिस लॉन्ग कन्वर्सेशन दैट वी हैव हैड, कि ऐसे दस हज़ार यंग पीपल कहीं से आए, जो पॉलिटिक्स ज्वाइन करें, जिनकी मदद मैं जानता हूं, आप करेंगे। आप इसके बारे में क्लोजिंग-
- NMNarendra Modi
देखिए, आप जो कह रहे हैं वो कैंडिडेट बनने के क्वालिफिकेशन बोल रहे हैं।
- NKNikhil Kamath
हां, करेक्ट।
- NMNarendra Modi
पोलिटिशियन बनने के नहीं कह रहे हैं आप।
- NKNikhil Kamath
राइट!
- NMNarendra Modi
पोलिटिशियन बनने के लिए तो बहुत क्वालिफिकेशन चाहिए। आपको हर पल हजारों आंखें देखती हैं। आपका एक शब्द इधर-उधर हो जाए, तो आपकी दस साल की तपस्या मिट्टी में मिल जाती है। आपको ट्वेंटी फोर बाइ सेवन कॉन्शस रहना पड़ता है।... आपको उसके साथ जीना पड़ता है। अनप्रिसिडेंटेड क्वालिटी चाहिए जी और क्वालिफिकेशन वही है और यह कोई यूनिवर्सिटी की सर्टिफिकेट से नहीं निकलता है जी।
- NKNikhil Kamath
आप क्या कहना चाहेंगे? ऐस अ बाय मैसेज, ऐस अ पार्टिंग मैसेज टू ऑल द यंग पीपल वाचिंग दिस शो। अगर उनके लिए आपका एक मैसेज है।
- NMNarendra Modi
मैं, मैं सबसे पहले माताओं, बहनों को और नौजवान बेटियों को कहना चाहूंगा कि आज हमारे देश में करीब-करीब हर राज्य में कम अधिक मात्रा में हो, लेकिन करीब फिफ्टी परसेंट विमेन रिजर्वेशन है। पंचायत में, ग्राम प्रधान, नगर पालिका, महानगरपालिका। उन्होंने कोशिश करनी चाहिए कि सच्चे अर्थ में एक लीडरशिप के लिए यह नहीं सोचना चाहिए कि चलो भाई महिलाओं की जरूरत है, इसलिए मुझे बैठा दिया है और मैं भी... जी नहीं, आपने समाज को लीड करना है। पुरुषों को भी लीड करने की जरूरत है तो आपको करना है। यह मेरी माताएं, नौजवान बेटियां, यह लीडरशिप की क्वालिटी के साथ खड़ी हो जाए। यह इसलिए मैं कह रहा हूं कि बहुत ही निकट भविष्य में एमएलए और एमपी के में भी थर्टी परसेंट रिजर्वेशन आने वाला है। उस समय हमें बहुत इस प्रकार के समूह की जरूरत पड़ेगी। तो अभी दो चार साल का समय है। उनसे आग्रह करूंगा कि आप मैदान में उतरिए और जितना ज्यादा अपने आप को योग्य बना सकते हैं, बनाने के लिए प्रयास शुरू कीजिए। समय है, यह समय आपका है, यह समझें। दूसरा, मैं देश के नौजवानों से कहूंगा कि आप राजनीति को बुरा मत मानिए और चुनाव ही राजनीति है, इसलिए मर्यादा में मत सहीए। राजनीतिक क्षेत्र, सार्वजनिक जीवन में आइए, एक बार। किसी भी रूप में आइए और आज देश को लीडरशिप चाहिए, जो रचनात्मक, रचनात्मकता की कोख से पैदा हुई हो। आंदोलन की कोख से पैदा हुए राजनेता अलग प्रकार का मॉडल बनता है। आजादी के आंदोलन में रचनात्मकता भी थी तो एक अलग प्रकार का लौट मिला। अब देश को रचनात्मकता यानी कुछ क्रिएटिव सोचने वाले, नया करने वाले, खुद को तैयार करने वाले, सुख दुख समझने वाले, रास्ते निकालने वाले, दूसरे को नीचा दिखाने वाले नहीं, देश के लिए रास्ता निकालने वाले। ऐसे बहुत बड़े वर्क की जरूरत है देश को। आज नहीं है, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं। नएयों की जरूरत है और आज जो बीस, पच्चीस साल का है, वो अगर आगे आता है तो ट्वेंटी फोर्टी सेवन तक वो चालीस पचास का हो जाएगा। यानी कि ऐसी प्रॉपर जगह पर होगा जब कि वो देश को चला लेगा। दूसरा, मैं जब यह देश के नौजवानों को कहता हूं कि आप आगे आइए तो कुछ लोगों को लगता होगा कि मैं भाजपा का झंडा फहराना चाहता हूं। मैं देश की राजनीति की बात कर रहा हूं। मैं भारतीय जनता पार्टी में आओ या फलानी पार्टी में जाओ या फलानी पार्टी में न जाओ, ऐसा मैं किसी को नहीं कह रहा हूं। मैं तो चाहता हूं, सभी दलों में एक प्रकार से न्यू फ्लो आना चाहिए, सभी दलों में आना चाहिए। बीजेपी में तो आना ही चाहिए, लेकिन सब दलों में आना चाहिए। कि देश में नौजवान आगे आए ताकि एक नयापन शुरू हो।
- NKNikhil Kamath
थैंक यू, मोदी जी, आपने यहां-
- NMNarendra Modi
चलिए, बहुत अच्छा लगा। मेरे लिए-
- NKNikhil Kamath
इतना टाइम दिया आपने हमारे साथ, थैंक यू सो मच।
- NMNarendra Modi
मुझे पता नहीं ये कैसा जाएगा, आप लोगों को, आपके दर्शकों को।
- NKNikhil Kamath
यू स्पोक एक्सट्रीमली वेल, एज ऑलवेज एंड वेरी काइंड कि यू टूक दिस मच टाइम विद अस।
- NMNarendra Modi
चलिए, आपकी टीम भी थक गई होगी। यह मौसम यहां का ध्यान रखिए, ठंड होती है।
- SPSpeaker
...
Episode duration: 2:06:20
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